काठमांडू में गुरुद्वारा नानकमट्ठ में बड़े स्तर पर मनाया गया गुरुपूर्व

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Sunday, November 17, 2013-4:36 PM

काठमंडू (जुगिन्दर संधू): नेपाल की राजधानी काठमंडू में स्थित ऐतिहासिक गुरुधाम गुरुद्वारा नानकमट्ठ (विशणूमती) में मनाए जा रहे 544 ओए गुरुपूर्व के मौकों पर नेपाल की पूर्व मंत्री और प्रधान मंत्री बाबू राम भट्टराए की धर्म पत्नी हिसिला यामही ने सारी संगतों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं दीं।

संगतों को संबोधन करते हुए उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने नेपाल की यात्रा करके नेपाल और भारत के संबंधों को मज़बूत किया। उन्होंने इस देश की संगत पर विशेष परोपकार किया और उन को सत्य का रास्ता दिखाया। उन्होंने कहा कि मेरे हल्के में स्थित इस गुरुधाम को सब सहूलतें मुहैया करवाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि इसकी सुंदर उसारी की जाएगी और विशाल निर्माण कार्य किया जाएगा। जिससे देश-विदेश की संगतें यहां आकर नमस्तक हो सकें।

नेपाल में भारत के राजदूत रणजीत राय ने कहा कि गुरुद्वारा नानकमट्ठ बहुत ऐतिहासिक महत्व रखता है और इस सम्बन्ध में एस एस. पी. सिंह ओबरॉय की तरफ से जो सेवा निभाई जा रही है, उनका एक विशेष योगदान है। उन्होंने कहा कि काठमंडू स्थित गुरुधामों की उसारी के साथ यहां संसार भर की संगत आकर्षक होगी और इसके साथ नेपाल की आर्थिकता को बड़ी स्वीकृति मिलेगी। पुडूचेरी के पूर्व गवर्नर स. इकबाल सिंह ने समूह संगतें को श्री गुरु नानक देव जी के गुरुपूर्व की शुभकामनाएं देते कहा कि वह ही व्यक्ति नेक मनुष्य बनता है, जिस पर अपनी माता का आशीर्वाद हो और वह गुरु की तरफ से दिखाए रास्ते पर चले।

उन्होंने कहा कि समूह संगत को गुरु नानक देव जी ने हरेक का भला मांगने की शिक्षा दी। जम्मू-कश्मीर के पूर्व कैबिनेट मंत्री स. रणजीत सिंह ने गुरु नानक देव जी की नेपाल यात्रा पर विस्तार पहले जानकारी दी और कहा कि गुरु साहब ने 500 सालों से भी पहले नेपाल का सम्बन्ध सिख पंथ के साथ जोड़ दिया था। मोहाली के आई. पी. एस. अधिकारी स. हरचरन सिंह भुल्लर ने इस मौके पर संबोधन करते कहा कि नेपाल में रहते पंजाबी और सिख बच्चों को जहां पंजाबी भाषा की पढ़ाई करवानी ज़रूरी है।

उसके साथ उनको गत्के की शिक्षा भी दी जानी चाहिए। गुरुद्वारा गुरुतेग़ बहादुर नगर जालंधर के प्रधान जगजीत सिंह गापा ने कहा कि गुरु साहिबान की तरफ से चलाई गई लंगर की प्रथा आज संसार में इतनी फैल चुकी है कि रोज़मर्रा की गुरुद्वारों के और स्थानों में 8करोड़ श्रद्धालु भोजन छकते हैं।

'चढ़ती कला' के संपादक जगजीत सिंह सहानुभूति रखने वाला ने गुरुद्वारा गुरु गुरुद्वारा नानकमट्ठ के इतिहास से संगत को जानकार करवाया और कहा कि एस. पी. सिंह ओबरॉय और स. प्रीतम सिंह के यतनों सदका 100 करोड़ से अधिक का मास्टर पलाण तैयार किया गया है। जिसके साथ इस गुरुधाम का ख़ूबसूरत निर्माण किया जाएगा। गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की तरफ से आईं शखसियतें को भेंट करके सम्मानित किया गया।

इस मौके पर पंजाब के पूर्व डी. जी. पी. महल सिंह भुल्लर, एस. पी. आहलूवालीया, गुरुद्वारा दुख निवारण करने साहब लुधियाना के प्रधान प्रितपाल सिंह और ओर शखशियतें मौजूद थे। इस मौके पंजाब से आए प्रसिद्ध रागी जत्थों ने गुरुबानी का रस-शामक कीर्तन करके संगतों को निहाल किया।

 


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