कारगिल की जंग के दौरान पांव खोने के बावजूद जारी है 'ज़िंदगी की उड़ान'

  • कारगिल की जंग के दौरान पांव खोने के बावजूद जारी है 'ज़िंदगी की उड़ान'
You Are HerePunjab
Saturday, December 28, 2013-10:24 AM

जालंधर (जुगिन्दर संधू) : दविन्दर पाल सिंह को आज भी कारगिल की जंग का वह समय याद है, जिसमें एक बम के फटने के उपरांत उसे अंगहीनों वाली ज़िंदगी गुज़ारने के लिए मजबूर होना पड़ा था। परन्तु इस घटना के बावजूद यह मजबूरी उनकी ज़िंदगी और सोच की उड़ान को रोक नहीं सकी, बल्कि उनके हौसले पहले की अपेक्षा भी बुलंद हो गए और आज वह न सिर्फ़ ख़ुद शान के साथ जी रहे हैं बल्कि संसार भर के अपाहिज लोगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बन गए है।

भारत और पाकिस्तान दरमियान 1999 में लड़ी गई जंग में दविन्दर पाल सिंह भी पूरे उत्साह और जोश के साथ शामिल था। दुश्मनों को हराने और पिछाड़न के लिए उस का विश्वास और हौसला बेमिसाल था और यदि कारगिल की जंग में भारत को फतह नसीब हुई तो उस में दविन्दर पाल सिंह जैसे योद्धाओं का बड़ा योगदान रहा। इस जंग दौरान ही एक दिन पाकिस्तान की तरफ से फेंका बम उनके बिल्कुल नज़दीक आ कर फटा और उनकी दाहिनी टांग बुरी तरह से जख्मी हो गई। डाक्टरों ने ऑपरेशन करके उसे ठीक करना चाहा परन्तु टांग में बहुत ज़्यादा इन्फ़ेक्शन फैल जाने के कारण आख़िरकार उस की टांग काटनी पड़ी। उस समय उनकी उम्र केवल 24 -25 साल थी।

टांग काटे जाने के बावजूद उनके हौंसला कम नहीं हुए और अपनी ज़िंदगी को फिर पटरी पर ले आया, सिर्फ़ चलने के लिए ही नहीं, बल्कि दौड़ने के लिए। वर्तमान में अपनी दाहिनी टांग के साथ एक यंत्र बाँध कर 39 साला दविन्दर पाल भी आम लोगों की तरह दौड़ सकता है। इस हौंसले की बजह से ही वह 2009 से ले कर अब तक मैराथन दौड़ में भाग लेता आ रहा है और ढेर सारे इनाम और तमगे हासिल किए हैं।

इसके साथ-साथ दविन्दर पाल सिंह ने अपने जैसे ओर लोगों को उत्साहित करने की मुहिम भी चलाई हुई है जिससे वह अपंग होते हुए भी ज़िंदगी की लड़ाई न सिर्फ़ लड़ सकें, बल्कि फतह हासिल कर सकें। यूनाइटेड नेशन अनुसार संसार भर में इस समय एक अरब के करीब अपंग लोग रहते हैं, जिन में से 4 से 8 करोड़ तक अकेले भारत में रहते हैं। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में बुनियादी सहूलतों की कमी कारण और ज़रुरी सामान की कमी के कारण अपंग लोगों को यहाँ काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता। हर कोई दविन्दर पाल सिंह जैसा हिम्मतवाला और बहादुर योद्धा नहीं हो सकता, जो अपने बलबूते पर जीवन की तलख़ हकीकतों के साथ टक्कर ले सके।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You