'आप' का पंजाब में अस्तित्व नाममात्र, नहीं हैं इनके पास कोई बेहतर 'नेता'

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Saturday, December 28, 2013-10:28 AM

जालंधर (नीरज बाली) : दिल्ली की तरह पंजाब की धरती पर राजनीतिक जमीन तलाश रही आम आदमी पार्टी बेशक दिल्ली की जीत के बाद उत्साहित है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि फिलहाल पंजाब में इनका वजूद नाममात्र है। इनके कार्यकर्ताओं से बात करने पर यह नेताओं जैसे गोलमोल जवाब तो जरुर देते हैं लेकिन इनके पास केजरीवाल जैसा कोई बड़ा नेता नहीं है और न ही इनमें से कई नेताओं को पूरी तरह से पंजाब के उन मुद्दों की जानकारी नहीं जो पंजाब की जनता को सता रहे हैं।

पंजाब इकाई में 'आप' के कुल सात सदस्य हैं जिनमें एक संजोयक, एक सेक्टरी एक केशियर और बाकी चार कमिटी मेंबर हैं जिनमें एक-आध को छोड़ बाकियों का राजनीति से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं। रटा-रटाया इनका ब्यान कि आम आदमी ही हमारा नेता है सवाल खड़ा करता है कि आम आदमी तो पहले से ही पंजाब में रह रहा है और क्रांति के नाम पर आम आदमी और आम आदमी पार्टी की हलचल लगभग शून्य है, तो आम आदमी पार्टी कि फिर जरुरत क्या है? जाहिर है दिल्ली की तरह अगर आम आदमी पार्टी पंजाब में अपना कोई अस्तित्व बनाना चाहती है तो एक केजरीवाल का होना लाजमी होगा है।

अकाली दल से निकले मनप्रीत बादल पहले ही अपनी किस्मत आजमा चुके हैं जिन्हें लोगों ने तरजीह नहीं दी, दावा उन्होंने भी पंजाब परिवर्तन का किया था। इसी साल अस्तित्व में आई 'आप' की पंजाब इकाई ने फिलहाल जालंधर के इलावा कहीं कोई बड़ी लड़ाई नहीं लड़ी। जालंधर में भी पिछले छह दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे 'आप' के दो कार्यकर्तायों की केजरीवाल और उनके बड़े सिपहसलाहरों ने अभी तक सुध नहीं ली।

पार्टी की तरफ से दावा किया जा रहा है कि चार दिनों में 2200 लोग उनके साथ जुड़ें हैं लेकिन भूख हड़ताल पर गिने चुने 10-12 लोग ही मौजूद होतें हैं और यह भूख हड़ताल भी 30 दिसंबर तक ही रहेगी। 'आप' की पंजाब इकाई के सात सदसीय कमिटी फिलहाल दिल्ली में हैं और जालंधर में यह दोनों शख्स अकेले कुछ लोगों के साथ लड़ाई लड़ रहे हैं हालांकि न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी और न ही किसी स्थानीय नेता ने इनकी सुध ली है जाहिर है नेता भी इन्हें तवज्जो देकर हीरो नहीं बनने देना चाहते।

पंजाब में 'आप' के 'स्व्यभू नेता'
दिल्ली में सत्ता पर काबिज होने की खबर के बाद जालंधर में मिठाई बांटने वाले पंजाब इकाई के कार्यकर्ताओं के अपने पास पार्टी की तरफ से अधिकारिक तौर पर लिखित कोई चिट्ठी तक नहीं है इसके विपरीत वह पंजाब में 10-10 रूपए लेकर मेंबरशिप मुहीम चला रहे है जिसमें यह तक नहीं देखा जा रहा है कि कौन व्यक्ति किस पृष्ठ भूमि का है यानि कोई भी अपराधिक छवि का व्यक्ति आम आदमी पार्टी को दस रुपय देकर सदस्यता ले सकता है? इस पर इनके कार्यकर्ताओं का कहना है कि हम लोगों से पूछ रहे हैं कि क्या उन पर कोई मुक़दमा तो नहीं दर्ज।

दिल्ली के दिग्गजों का असर पड़ सकता है पंजाब के यूथ पर

मुख्यमंत्री बनने के बाद अगर केजरीवाल ने भ्रष्टाचार कि लड़ाई जारी रखते हुए दो चार को जेल की हवा खिला दी तो निश्चित तौर पर दिल्ली के साथ साथ बाकि राज्यों का कम से कम यूथ जरुर प्रभावित होगा। उसका कारण एक यह भी है कि पंजाब में कांग्रेस, भाजपा कुछ गिने चुने चहेतों को ही गले लगाएं हैं जिससे बाकी का यूथ नाराज है या फिर वो नौजवान स्टूडेंड जिन्होंने अभी तक राजनीति का मुह तक नहीं देखा पर किसी न किसी तरह से राजनीति का शिकार जरुर हुए हैं। वो आप का दामन थाम सकते हैं अगर 'आप' की पंजाब इकाई केजरीवाल के नक्शे-कदम पर चली तो।

भाजपा, कांग्रेस को नहीं है 'परवाह'

पंजाब से विधायक के.डी भंडारी का कहना है कि भाजपा पंजाब के घर घर तक पहुंची है आप के इस तरह के अनशन से भाजपा को नुकसान नहीं हो सकता, वहीं पंजाब कांग्रेस के दिग्गज ने कहा हमे आप पर किसी तरह कि कोई प्रतिक्रिया नहीं देनी।

इस तरह से आ सकती है पंजाब में 'आप' की लहर
दिल्ली में कांग्रेस को धुल चटाने वाली केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की जनता के दिलों में अपनी जगह बनाने के लिए लोगों से जुड़ने की मुहीम चलाई जिसमें सोशल नेटवर्किंग साइट्स के साथ-साथ लोगों के साथ व्यक्तिगत तौर पर नजदीकियां बढ़ाई सरकार के खिलाफ बगावत कर लोगों के कटे बिजली के कनेक्शन जोड़े रिश्वत के खिलाफ शरेआम पर्चे बांटें। इसके विपरीत पंजाब में इस तरह की कोई हलचल नहीं दिखी कि जिससे लोग इनसे प्रभावित हों सकें।

पंजाब इकाई या जिलों की इकाई को पंजाब की भूगोलिक स्थिति समझने की जरुरत होगी। शहर से लेकर गांवों तक लोगों कि मुश्किलें जानने के लिए इन्हें पूरे राज्य स्तर में मुहीम चलानी होगी। क्यूंकि भ्रष्टाचार के इलावा नशा और कई गम्भीर मुद्दें पंजाब में विदयमान हैं। कार्यकर्तायों को अधिक से अधिक लोगों को अपने साथ जोड़ने की कवायद शुरू करने की जरुरत है। ख़ास तौर पर इन्हें पंजाब में कुछ इस तरह के जन हितों में काम करने होंगें जिस से मीडिया में इन्हें जगह मिल सके। पंजाब का यूथ काफी पड़ा लिखा और सूझवान है।

जाहिर है इन्हें साथ जोड़ने के लिए 'आप' की पंजाब इकाई को अभी बहुत मेहनत करनी होगी। पंजाब में जनता को तंग करने वाले सरकार के नागुजार फरमान, पंजाब पुलिस के रोज चर्चा में आते रवैये, सेहत सुविधाओं में अभाव के खिलाफ 'आप' को अपनी आवाज़ काफी बुलंद करनी पड़ेगी, सिर्फ़ सपने दिखा या 'आम-आदमी आम-आदमी' का रट्टा लगा कर जनता साथ नहीं जुड़ने वाली। पंजाब में 'आप' के 'स्व्यभू नेता' दिल्ली में सत्ता पर काबिज होने की खबर के बाद जालंधर में मिठाई बांटने वाले पंजाब इकाई के कार्यकर्ताओं के अपने पास पार्टी की तरफ से अधिकारिक तौर पर लिखित कोई चिट्ठी तक नहीं है।

इसके विपरीत वह पंजाब में 10-10 रूपए लेकर मेंबरशिप मुहिम चला रहे है जिसमें यह तक नहीं देखा जा रहा है कि कौन व्यक्ति किस पृष्ठ भूमि का है। यानि कोई भी अपराधिक छवि का व्यक्ति आम आदमी पार्टी को दस रुपय देकर सदस्यता ले सकता है? बेशक आम आदमी पार्टी की पंजाब ईकाई आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर केजरीवाल से मिलकर भावी रणनीतियां बना रही है, लेकिन जो बदलाव दिल्ली में इतने कम समय में हुआ है वह पंजाब में होना मुमकिन नहीं होगा और लोकसभा की एक भी सीट को जीत पाना इनके लिए टेढी खीर साबित होगा।


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