अडवानी को टिकट के मामले में भाजपा दोफाड़

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Thursday, January 23, 2014-7:34 PM

जालंधर (पाहवा): देश में युवाओं को आगे लाने तथा चुनाव लड़ाने की राजनीतिक दलों की योजना कई वरिष्ठ नेताओं की टिकट में आड़े आने लगी है।  आम आदमी पार्टी की तरफ से नए चेहरे मैदान में उतार कर जीत हासिल करने को लेकर अन्य दल भी उसी राह पर चलने की कोसिस में हैं। लेकिन इसके चलते भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण अडवानी की टिकट को लेकर नए स्वाल उठने लगे हैं। 

 
जानकारी के अनुसार गांधीनगर से लाल कृष्ण अडवानी चुनाव लड़ते हैं, उन्हें टिकट देनो को लेकर भाजपा में दो गुट बन गए हैं। एक गुट जो अडवानी को टिकट देने का विरोध कर रहा है का कहना है कि जिस प्रकार कांग्रेस नेता सोनिया गांधी तथा शरद पंवार ने टिकट लेने की बजाए मार्गदर्शन करने की राजनीति को अपनाया है, उसी प्रकार अडवानी को भी चाहिए कि वे टिकट लेकर मैदान में उतरने की बजाए नए चेहरों को आगे आने का अवसर दें तथा पार्टी में मार्गदर्शक की भूमिका अदा करें। 
 
इसी खींचतान में यह भी रहा जा रहा है कि श्री अडवानी को अब राज्यसभा में लेकर जाना चाहिए। जबकि दूसरी तरफ अडवानी समर्थकों का कहना हगै कि यह किसी तरह से भी तर्कसंगत नहीं है। इन लोगों का दावा है कि चुनावों के बाद अगर नरेंद्र मोदी के नाम पर किंतु परंतु होता है तो अडवानी सहयोगी दलों को समझाने तथा भाजपा व उक्त दलों के बीच सेतु का काम करेंगे। ऐसे में उनका चुनाव लडऩा व जीतना जरूरी है। 
 
अडवानी विरोधी लॉबी कहता है कि अगर अडवानी को टिकट दिया जाता है तो भाजपुा की उस सोच को लेकर स्वाल खड़े हो सकते हैं जिसमें 25 प्रतिशत नए चेहरों को टिकट देने की बात कही जा रही है। इससे नई जनरेशन को आगे लाने के लिए तथा युवा वर्ग को पार्टी के साथ जोडऩे में दिक्कत आ सकती है। 
 
हालही में दिल्ली में भाजपा अधिवेशन में भी एक गुट ने इस बात को लेकर काफी हद तक प्रचार करने की कोशिश की है कि अडवानी को सोनिया व पंवार की तरह भाजपा में एक नया अध्याय जोडऩा चाहिए तथा खुद चुनाव लडऩे की बजाए अन्य नेताओं के लिए प्रचार करने से लेकर मामलों पर ध्यान देना चाहिए।

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