भुल्लर को फांसी पर नहीं लटकाना चाहते राष्ट्रपति

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Wednesday, March 12, 2014-4:53 PM

नई दिल्ली: खालिस्तानी आतंकवादी देविंदर पाल सिंह भुल्लर की फांसी की सज़ा को लेकर राष्ट्रपति और गृह मंत्रालय के बीच अलग-अलग राय हो गई है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भुल्लर को फांसी पर लटकाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग की उस सिफारिश का समर्थन किया है, जिसमें भुल्लर की फांसी की सज़ा को उम्रकैद में तबदील करने की बात कही गई है। दूसरी तरफ गृह मंत्रालय इसके साथ सहमत नहीं है।

गृह मंत्रालय भुल्लर पर किसी भी तरह के रहम किए जाने के खिलाफ़ है। हालांकि राष्ट्रपति दफ्तर और गृह मंत्रालय की तरफ से इस मामले पर यह कहते हुए प्रतिक्रिया ज़ाहिर नहीं की गई कि यह मामला अभी विचाराधीन है। भुल्लर की पत्नी ने इस मामले से संबंधी रहम की याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि भुल्लर मानसिक तौर पर बीमार है, इसलिए उसे फांसी न दी जाए। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति और गृह मंत्रालय के बीच अलग-अलग राय के कारण भुल्लर की रहम की याचिका पर फ़ैसला लेने में देरी हो रही है।

राष्ट्रपति का मानना है कि भुल्लर की मानसिक हालत को देखते हुए इन हालात में उसे फांसी नहीं दी जा सकती। राष्ट्रपति ने नजीब जंग की राय पर भरोसा ज़ाहिर किया है। मैडीकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर नजीब जंग ने भुल्लर को फांसी न दिए जाने की सिफारिश की थी। यह सिफारिश जनवरी में ग्रह मंत्रालय को भेजी गई थी। नजीब जंग ने राय दी थी कि भुल्लर बिना दिमाग़ वाला बच्चा है। उसकी सेहत ठीक नहीं है, इसलिए उस की फांसी की सज़ा को उम्रकैद में बदला जाए।

गौरतलब है कि देविंदर पाल सिंह भुल्लर 1993 में दिल्ली में हुए बम धमाकों का आरोपी है, जिसमें 9 लोग मारे गए थे और 25 ज़ख्मी हो गए थे। इस धमाको में तत्कालीन यूथ कांग्रेस ने प्रमुख एम. एस. बिट्टा भी ज़ख्मी हो गए थे। गृह मंत्रालय भुल्लर की अतिवाद सम्बन्धित कार्यवाही को देखते हुए उस पर रहम किए जाने के खिलाफ है। मई, 2011 में उस समय की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी भुल्लर की रहम की याचिका को रद्द कर दिया था।

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