लोकसभा चुनाव: कांग्रेस के लिए कयामत, BJP की स्थिति करो या मरो की

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Wednesday, March 19, 2014-4:51 PM

जालंधर: देश में होने जा रहे लोकसभा चुनाव इस बार कांग्रेस के लिए जहां कयामत की घड़ी है वहीं भाजपा के लिए यह चुनाव करो या मरो की नीति पर आधारित है। भाजपा 10 वर्ष तक केंद्र की सत्ता में आने का सपना संजा कर चल रही थी लेकिन अगर वर्ष 2014 के चुनावों में कोई कमी रह गई तो फिर से पांच वर्ष तक इंताजर करना पड़ेगा। ऐसे में पार्टी अपनी तरफ से कोई कमी नहीं छोडऩा चाहती जिससे कि केंद्र की सत्ता हथियाई जा सके।

भाजपा अब मुस्लिम वोट बैंक को लेकर न केवल चिंतित है बल्कि ‘मुस्लिम फॉर मोदी-मोदी फॉर मुस्लिम’ का नारा लेकर चलने लगी है। यही एक कारण है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह पुरानी भूलों के लिए मुसलमानों से माफी मांगने तक को तैयार हो गए थे जिसमें राजनीतिक मजबूरी साफ झलक रही थी। जानकारी के अनुसार देश की 35 लोकसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 30 प्रतिशत से ज्यादा है।

38 सीटें ऐसी हैं, जिन पर मुस्लिम मतदाता 21 से 30 प्रतिशत हैं और 145 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम वोटर 11 से 20 प्रतिशत के बीच है। इसका सीधा मतलब है कि 20 प्रतिशत और इससे ऊपर मुस्लिम वोटरों वाली लोकसभा सीटों की संख्या 218 हैं। उधर मौलाना तौकीर रजा, अध्यक्ष, इत्तिहाद मिल्लत काउंसिल के तेवर अलग ही हैं। रजा ने हाल ही में साफ कहा था कि गलती तो वह होती है जो अनजाने में हो जाए।

जानबूझ कर की गई गलती गलती नहीं कहलाती और न ही उसकी माफी हो सकती है। राजनाथ सिंह तो उलटी बात कर रहे हैं। वह मुसलमानों से ही उलटा हिसाब मांग रहे हैं कि बताओ उनसे क्या क्या गलती हुई है। मौलाना कल्बे सादिक उपाध्यक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी हाल ही में कहा था सवाल भरोसा जीतने का है। नरेंद्र मोदी या बीजेपी को क्या उनके अकेले माफ  कर देने भर से सारे मुसलमान माफ कर देंगे। उनके इस ब्यान ने भाजपा की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं जिससे पार पाना पार्टी के लिए आसान नहीं है।

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