जब डिलीवरी के लिए घंटो तड़पती रही महिला

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Friday, March 28, 2014-6:01 PM

अमृतसर: अमृतसर के सिविल अस्पताल में एक महिला डिलीवरी के लिए घंटो तड़पती रही। बताया जा रहा है कि महिला ने लेबर रूम के बाहर ही मृतक बच्चे को जन्म दिया। अस्पताल प्रशासन मामले को दबाने के लिए काफी जद्दोजहद करता रहा, परंतु मामला मीडिया में आने के बाद सिविल सर्जन ने भी खानापूर्ति करते हुए जांच के आदेश दे दिए है।

जानकारी के अनुसार कुलविंदर कौर पत्नी कुलदीप सिंह पिछले दो महीने से इस अस्पताल में अपना चेकअप करवा रही थी। जब कुलविंदर की डिलीवरी का समय नजदीक आया और वह अपनी मां के साथ अस्पताल पहुंची।  डिलीवरी के लिए वह अस्पताल में घूमती रही, पर किसी ने भी उसकी सुध नहीं ली। तभी एक स्टाफ कर्मचारी ने पीड़िता को कहा कि उसकी डिलीवरी यहां नहीं होगी, किसी दूसरे अस्पताल चली जाओ। पीड़िता काफी देर तक वहीं बैठकर मदद की गुहार लगाती रही।

जब एम्बुलेंस आई तो पीड़िता एम्बुलेंस पर पैर रखने ही लगी थी कि उसके बच्चे का सिर बाहर आ गया। उसके परिजन तुरंत उसे दोबारा अस्पताल ले गए, लेकिन इसके बाद भी किसी स्टाफ ने महिला के दर्द को नहीं समझा। इसी दौरान किसी मरीज ने पीड़िता के परिजनों को  लेबर रूम (आप्रेशन थियेटर) का रास्ता दिखाया। वहां पर उपस्थित स्टाफ ने जब महिला की डिलीवरी की तो मरा हुआ लड़का पैदा हुआ।

पीड़िता की मां ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बच्चे की जान डाक्टरों की लापरवाही के कारण हुई है। यदि समय पर उनकी बेटी का ईलाज हो जाता तो आज उनका बच्चा जीवित होता।  इस मामले में सिविल सर्जन ऊषा बांसल ने जांच के आदेश दिए है। ऊषा का कहना है कि जांच के दौरान जो तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार बनती कार्रवाई की जाएगी।

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