बच्चे की मौत मामले में अस्पताल स्टाफ को क्लीन चिट

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Sunday, March 30, 2014-3:51 PM

अमृतसर: सिविल अस्पताल में डिलीवरी से पहले बच्चे की हुई मौत पर सिविल सर्जन डा. ऊषा बांसल ने समूह स्टाफ को क्लीन चिट दे दी है। सिविल सर्जन ने कहा है कि मरीज खुद रात को 8 बजे आया था और उसके बच्चे की दिल की धड़कन स्टाफ को न सुनने के कारण अल्ट्रासाऊंड टैस्ट के लिए गुरु नानक देव अस्पताल के बेबे नानकी हैल्थ केयर सैंटर के लिए रैफर कर दिया गया था।

सिविल सर्जन डा. ऊषा बांसल ने ‘पंजाब केसरी’ से बातचीत करते हुए बताया कि उन्होंने इस मामले संबंधी सभी स्टाफ और अस्पताल के एस.एम.ओ. को तलब किया था। जांच के दौरान पाया गया कि जब मरीज रात्रि 8 बजे आया तो लेबर रूम में मौजूद स्टाफ ने तुरंत बच्चे की धड़कन देखी। स्टाफ को धड़कन न सुनने पर अस्पताल में अल्ट्रासाऊंड उस समय मौजूद न होने के कारण बेबे नानकी हैल्थ केयर सैंटर में रैफर करने की बात कही थी।

डा. बांसल ने कहा कि मरीज के रिश्तेदार उसके पश्चात शोर मचाने लगे, जब एंबुलैंस में उपरोक्त महिला चढऩे लगी तो उसका बच्चा बाहर आ गया। डाक्टरों ने जांच करके डिलीवरी की तो मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ। डाक्टरों की ओर से डिलीवरी के समय हुए बच्चे की फोटो भी उन्हें दिखाई गई है, जिसमें बच्चे का मांस उतर रहा था। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि बच्चा पहले ही पेट में मर चुका था। उन्होंने कहा कि इस मामले में स्टाफ का कोई कसूर नहीं है।

जब डिलीवरी के लिए घंटो तड़पती रही महिला

 

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