फिल्लौर में नहीं बन पाए फायर ब्रिगेड, ब्लड बैंक व स्थायी बस स्टैंड

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Thursday, December 15, 2016-12:31 PM

विधानसभा हलका फिल्लौर से 2 ही प्रमुख पार्टियां कांग्रेस व शिअद के बीच ही मुकाबला होता रहा है। वर्ष 1972 से लेकर आज तक ज्यादातर शिअद उम्मीदवार सरवण सिंह फिल्लौर ही इस हलके से विजयी हुए हैं जबकि 2 बार कांग्रेस के चौधरी संतोख सिंह भी जीत दर्ज करवाने में सफल रहे हैं। पिछले चुनावों में बसपा के उम्मीदवार बलदेव खैहरा ने 42 हजार से ऊपर वोट हासिल कर हलके के  समीकरण बदल कर रख दिए।

मुख्य मुद्दा
फिल्लौर व गोराया शहर में बस स्टैंड न होने के कारण लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इसके अलावा न तो फायर ब्रिगेड और न ही कोई ब्लड बैंक आज तक बन सका है। फिल्लौर के नूरमहल रोड की रेलवे लाइनों और गोराया शहर से निकलती रेलवे लाइनों के ऊपर या अंडरग्राऊंड गाडिय़ों के निकलने के लिए रास्ता बनाने की लोगों की प्रमुख मांग है जो अब तक हल नहीं हुई।

वायदे जो किए
-हलके में नई यूनिवर्सिटी व आई.टी.आई. बनानी।
-वाटर ट्रीटमैंट प्लांट लगवाना।
-फिल्लौर, गोराया में 100 प्रतिशत सीवरेज, वाटर सप्लाई।
-हलके में नए बिजली के ट्रांसफार्मर व नई तारें लगवाना।

वायदे जो वफा हुए
-गांव तेहिंग में यूनिवर्सिटी व गांव रूड़का में आई.टी.आई. बनवाई।
-वाटर ट्रीटमैंट प्लांट लगवाए जो चालू है।
-फिल्लौर गोराया में 100 प्रतिशत सीवरेज व वाटर सप्लाई।
-150 करोड़ रुपए की लागत से नए ट्रांसफार्मर व तारें लगवाईं।

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