एशिया कप हॉकीः भारत हारा, विश्व कप का इंतजार बढ़ा

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Sunday, September 01, 2013-8:34 PM

इपोहः भारत दूसरे हाफ में जाबांज प्रदर्शन करने के बावजूद दक्षिण कोरिया से एशिया कप हाकी टूर्नामेंट के रोमांचक खिताबी मुकाबले में रविवार को 3-4 से पराजित हो गया और अब विश्व कप में जगह पाने के लिए उसे इंतजार करना होगा। भारत ने मैच में दो बार पिछडने के बाद बराबरी हासिल की लेकिन कोरिया ने 68 वें मिनट में पेनल्टी कार्नर पर गोल से भारत की तीसरी बार खिताब जीतने की उम्मीदों को तोड दिया।भारत को विश्व कप की अपनी उम्मीदों के लिए अब ओसनिया चैम्पियनशिप समाप्त होने का इंतजार करना होगा।

भारत यदि एशिया कप जीत जाता तो वह 2014 में होने वाले विश्व कप के लिए कांटिनेंटल चैम्पियन के रुप में सीधे क्वालिफाई कर जाता। कोरिया विश्व कप के लिए पहले ही अपनी जगह पक्की कर चुका था और इस जीत से उसने अपना एशिया कप का खिताब बरकरार रखा। कोरिया की खिताबी जीत का फायदा सीधे मलेशिया को पहुंचा जो एशिया से एफआईएच की पहली रिजर्व टीम के रुप में विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर गया। मलेशिया जोहोर बाहरु में एफआईएच वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल में पांचवे स्थान पर रहकर पहली रिजर्व टीम था। मलेशिया हालांकि एशिया कप के कांस्य पदक मुकाबले में रविवार को पाकिस्तान से 1-3 से हार गया था।

एशिया कप के फाइनल में हार के बावजूद भारत की विश्व कप की उम्मीदें बरकरार हैं। भारत रोटर्डम में छठे स्थान पर रहने के कारण दूसरी रिजर्व टीम है लेकिन उसे ओसनिया चैम्पियनशिप के परिणाम का इंतजार करना होगा। ओसनिया चैम्पियनशिप आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और फिजी के बीच खेली जायेगी। चूंकि आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दोनों ही विश्व कप के लिये क्वालिफाई कर चुके हैं और इनमें से एक के खिताब जीतने की उम्मीद है।

इस सूरत में ओसनिया के खाली स्थान का फायदा भारत को मिलेगा जो दूसरी रिजर्व टीम के रुप में विश्व कप में जगह बना लेगा। यदि फिजी ने कोई अपसेट किया तभी भारत की उम्मीदें टूटेंगी लेकिन इसकी संभावना नगण्य लगती है। भारतीय टीम ने पहले हाफ में 0-2 से पिछडने के बाद दूसरे हाफ में शानदार खेल दिखाया। भारतीय खिलाडियों ने आखिरी पांच मिनटों में थोडा जोर लगाया होता तो वह खिताब जीत सकता था। लेकिन आखिरी मिनटों में गोल खाने की कमजोरी फिर उसके आडे आ गई।

पहले हाफ में भारत का खेल ढीला रहा जिसका फायदा उठाकर कोरिया ने दो मिनट के अंतराल में दो गोल ठोक डाले। जांग जोंग ह्यून ने 28वें मिनट में पेनल्टी कार्नर पर पहला गोल किया। भारतीय अभी इस झटके से संभलते कि यू हयो सिक ने 29वें मिनट में मैदानी गोल ठोक दिया। भारतीय खिलाडियों ने दूसरे हाफ बेहतर योजना के साथ खेल दिखाया। ड्रैग फ्लिकर रुपिन्दर पाल सिंह ने 48वें मिनट में पेनल्टी कार्नर पर सधा शाट गोल के ऊपरी दाएं हिस्से में पहुंचा दिया। मैच के 55वें मिनट में निकिन तिमैया ने मैदानी गोल से भारत को 2-2 से बराबरी दिला दी।

लेकिन दो मिनट बाद ही कोरिया को पेनल्टी स्ट्रोक मिल गया। नैम ह्यून वू ने स्ट्रोक पर भारतीय गोलकीपर पी आर श्रीजेश को छका दिया। मैच के 65वें मिनट में युवा स्ट्राइकर मनदीप सिंह ने ऊंचे क्रास पास पर पहले प्रयास में गोल कर भारत को 3-3 से बराबरी दिला दी। निर्धारित समय समाप्त होने से दो मिनट पहले कोरिया को पेनल्टी कार्नर मिला। कांग मून क्वोन ने 68वें मिनट के इस पेनल्टी कार्नर पर गोल दागकर भारत की 2007 के बाद पहली बार यह खिताब जीतने की उम्मीदों को तोड दिया। कोरिया ने चौथी बार यह खिताब अपने नाम किया।

विश्व कप की होड से बाहर हो चुके पाकिस्तान ने इससे पहले मेजबान मलेशिया को 3-1 से हराकर सांत्वना भरी जीत दर्ज की और कांस्य पदक हासिल किया। वर्ष 1971 में विश्व कप के शुरु होने के बाद पहली बार इस टूर्नामेंट की होड से बाहर हुए पाकिस्तान के लिए इस मैच में अब्दुल हसीम खान ने 35वें और 56वें मिनट में दो गोल तथा कप्तान मुहम्मद इमरान ने 54वें मिनट में एक गोल किया। मलेशिया का एकमात्र गोल फैजल सारी ने 34वें मिनट में किया। मलेशिया ग्रुप मैच में भी पाकिस्तान से 1-4 से हारा था। लेकिन कोरिया की भारत पर खिताबी जीत से मलेशिया को विश्व कप का टिकट मिल गया।


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