‘40 प्लस’ पेस और सचिन से प्रेरणा ले सकते हैं

  • ‘40 प्लस’ पेस और सचिन से प्रेरणा ले सकते हैं
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Tuesday, September 10, 2013-9:14 AM

नई दिल्ली: खेलों में ‘40 प्लस’ के क्या मायने होते हैं यह कोई टेनिस के योद्धा खिलाड़ी लिएंडर पेस और क्रिकेट के बादशाह सचिन तेंदुलकर से पूछ सकता है। पेस और सचिन भारतीय खेलों के दो ऐसे महान खिलाड़ी हैं जिन पर देश हमेशा गर्व करेगा। पेस और सचिन का करियर कई मायनों में एक समान है। दोनों ही अपने अपने खेलों के मास्टर हैं और 40 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी थमने को तैयार नहीं है।

भारतीय खेलों के इन दो दिग्गज खिलाडिय़ों में कई समानताएं हैं। इन्होंने बहुत कम उम्र में अपनी प्रतिभा को साबित कर दिखाया था कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं। सचिन का जन्म 24 अप्रैल 1973 को हुआ था जबकि पेस 17 जून 1973 को जन्में थे। सचिन ने मात्र 16 वर्ष की उम्र में 1989 में अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर का पदार्पण किया था जबकि पेस ने 17 वर्ष की उम्र में 1990 में जूनियर विंबलडन का एकल खिताब जीत लिया था।

पेस ने 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक में पहली बार देश का प्रतिनिधित्व किया था। इसी वर्ष सचिन ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में हुए एकदिवसीय विश्वकप में देश का प्रतिनिधित्व किया। क्रिकेट के बादशाह सचिन अब तक कुल छह बार विश्वकप खेल चुके हैं और 2011 में उन्होंने विश्वकप जीतने का अपना सपना पूरा किया था। पेस भी 1992 से लेकर 2012 तक छह बार ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और उन्होंने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में देश के लिये कांस्य पदक हासिल किया था।

पेस को 1996-97 में देश का सर्वोच्च राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया था तो सचिन उसके अगले वर्ष 1997-98 में इस सर्वोच्च पुरस्कार के विजेता बने थे। सचिन को अर्जुन पुरस्कार 1994 में पदमश्री 1999 में और पदमविभूषण 2008 में प्रदान किया गया था जबकि पेस को 1990 में अर्जुन पुरस्कार और 2001 में पदमश्री यूएस ओपन में 40 वर्ष की उम्र में सबसे उम्रदराज चैंपियन बने पेस अपने नाम 14 ग्रैंड स्लेम खिताबों का भारतीय रिकार्ड रखते हैं।

सचिन के नाम भी क्रिकेट के तमाम रिकार्ड मौजूद हैं। दोनों ही खिलाडिय़ों का करियर उतार चढाव के दौर से गुजरा था और चोटों से प्रभावित रहा था। दोनों के करियर में एक समय यह भी स्थिति आई थी कि जब चोटों के कारण लगने लगा था कि उनका करियर समाप्त हो जाएगा
लेकिन इन दिग्गज योद्धाओं ने चोटों से उबरकर खेल में जबरदस्त वापसी की। पेस और सचिन दोनों का ही मानना है कि उम्र कोई मायने नहीं रखती है यह सिर्फ एक आंकड़ा भर है।

पेस ने 40 वर्ष की उम्र में ग्रैंड स्लेम खिताब जीतकर साबित किया है कि वह अब भी रेस में बने हुए हैं। वन डे और टवंटी 20 को अलविदा कह चुके लेकिन टेस्ट क्रिकेट में जमे हुए सचिन के पास वेस्टइंडीज के खिलाफ नवंबर में दो टेस्टों की घरेलू सीरीज में यह साबित करने का मौका रहेगा कि वह अब भी थके नहीं है और 40 प्लस के इस संघर्ष में वह पेस से प्रेरणा लेकर 198 टेस्टों की रेस जारी रख सकते हैं।
 


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