श्रीनिवासन तीसरी बार बने BCCI के अध्यक्ष

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Monday, September 30, 2013-9:45 AM

चेन्नई: विवादों में घिरे रहने और घोर विरोध के बावजूद एन श्रीनिवासन को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष पद पर एक बार फिर निर्विरोध चुन लिया गया है। रविवार को वार्षिक आम बैठक में श्रीनिवासन को एक वर्ष के अतिरिक्त कार्यकाल के लिये अध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुन लिया गया जिससे लगातार तीसरे वर्ष भी बोर्ड प्रमुख का पद उन्हीं के पास रहेगा।

दिलचस्प यह है कि इस पद के लिए केवल उन्हीं का नामांकन दाखिल हुआ था। हालांकि बिहार क्रिकेट संघ की याचिका पर उच्चतम न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक श्रीनिवासन अपना कार्यभार नहीं संभालेंगे। बिहार संघ के सचिव आदित्य वर्मा ने अदालत में याचिका दायर कर श्रीनिवासन के दोबारा अध्यक्ष पद का चुनाव लडऩे पर रोक लगाने की अपील की थी। बोर्ड की बैठक से 24 घंटे पहले तक सभी निगाहें अध्यक्ष पद के लिए श्रीनिवासन की दावेदारी पर टिकी हुई थीं।

लेकिन विश्व की सबसे अमीर खेल संस्थाओं में से एक बीसीसीआई के सर्वोच्च पद के लिए सिर्फ श्रीनिवासन का नामांकन सामने आने से उनकाइस पद पर चुना जाना तय था। इस बीच संजय पटेल बोर्ड के सचिव जबकि अनिरुद्ध चौधरी कोषाध्यक्ष पद पर चुने गये हैं। हरियाणा क्रिकेट संघ के सचिव अनिरुद्ध चौधरी श्रीनिवासन के समर्थक माने जाते हैं। आईपीएल छह में सट्टेबाजी और फिक्सिंग की जांच से नाराज संजय जगदाले और अजय शिर्के के क्रमश इन पदों से इस्तीफा देने के बाद यह पद खाली हो गये थे।

इसके अलावा पांच जोन के उपाध्यक्ष भी निर्विरोध चुन लिये गए हैं। इनमें राजीव शुक्ला को सेंट्रल जोन, एस के बंसल को नोर्थ जोन, रवि सावंत को वेस्ट जोन, शिवलाल यादव को साउथ जोन और चित्रक मित्रा को ईस्ट जोन का उपाध्यक्ष चुना गया है। अनुराग ठाकुर को संयुक्त सचिव बनाया गया है। आईपीएल छह में अपने दामाद गुरुनाथ मयप्पन का नाम सट्टेबाजी में आने के बाद से 68 वर्षीय श्रीनिवासन लगातार परेशानियों में घिरे रहे थे लेकिन उन्होंने चुनाव लडने की घोषणा कर अपने इरादे साफ कर दिए थे।

हालांकि श्रीनिवासन ने खुद को बोर्ड अध्यक्ष के नियमित कामकाज से दूर रखा है और यह जिम्मेदारी जगमोहन डालमिया को दे रखी है। श्रीनिवासन की जीत इसलिए पुख्ता मानी जानी जा रही थी क्योंकि उन्हें दक्षिण क्षेत्र की सभी छह इकाइयों का समर्थन हासिल था जिससे उन्हें बोर्ड अध्यक्ष के तौर पर एक साल का विस्तार मिलने में कोई परेशानी नहीं हुई।


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