...तो सचिन बन जाते पहले खिलाडी ‘भारत रत्न’

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Tuesday, October 01, 2013-3:41 PM

नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ के मापदंडों में खेलों को शामिल करने के पीछे एकमात्र कारण सचिन तेंदुलकर होने का जब से खुलासा हुआ है तब से यह बहस छिड गई है कि यदि मास्टर ब्लास्टर 2011 में विश्व कप ट्रॉफी उठाने के बाद संन्यास ले लेते तो उन्हें सबसे पहले ‘भारत रत्न’ से सम्मानित कर दिया जाता।

हाल ही में यह खुलासा हुआ है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने सचिन के कारण ही ‘भारत रत्न’ के लिए मापदंडों में संशोधन किया था जबकि इससे पहले तक गृह मंत्रालय खेलों को भारत रत्न के लिए एक वर्ग के रुप में शामिल करने के खिलाफ था। गृह मंत्रालय का मानना था कि खेलों को भारत रत्न के लिए एक वर्ग बनाने की जरुरत नहीं है। लेकिन तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन, सांसद मधुसूदन यादव, महाराष्ट्र के राजनेताओं और समाज के कई वर्गों के आग्रह तथा दबाव के आगे गृह मंत्रालय ने इस मापदंड में संशोधन किया और खिलाडियों के ‘भारत रत्न’ बनने का रास्ता साफ किया।

मगर यह दिलचस्प है कि क्रिकेट के जिस भगवान को भारत रत्न बनाने के लिए इतनी कवायद की गई वहीं अब तक भारत रत्न से वंचित हैं जबकि मौजूदा खेल मंत्री जितेन्द्र सिंह ने हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को ‘भारत रत्न’ देने की सिफारिश का पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा है।


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