पढ़ें: असंभव आंकड़ों को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले 'क्रिकेट के भगवान' की गाथा

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Friday, October 11, 2013-10:32 AM

जालंधरः मौजूदा समय में क्रिकेट के भगवान रूप में बिख्यात हो चुके सचिन तेंदुलकर एक मध्‍यम वर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। उनके पिता स्‍कूल टीचर थे और उनके परिवार में दूर-दूर तक कोई क्रिकेट के करीब नहीं था।

लेकिन क्रिकेट की प्रतिभा को अपने आप में समेटे हुए सचिन में क्रिकेट के प्रति लगाव और बेअंत श्रद्धा कूट-कूट कर हुई थी और उनके अंदर छिपी प्रतिभा को पहचाना उनके पिताजी ने। सचिन को एक महान खिलाड़ी के रूप में उबारने के लिए उनके स्कूल टाइम के कोच आचरेकर की भूमिका को काफी महत्तवपूर्ण माना जाता है और इस बात को सचिन ने भी स्वीकारा है।

कहते हैं कि हीरे की परख जौहरी को ही होती है और शायद इसलिए ही सचिन के खेल को पहले दिन देख के ही आचरेकर उनके अंदर छुपी अद्वितीय प्रतिभा को पहचान गए थे। आपको बता दें कि महज 14 साल की उम्र में ही सचिन की क्रिकेट कला इस चरम पर थी कि स्कूल लेवल पर क्रिकेट खेलते हुए इस छोटे से लड़के के खेल से प्रभावित होकर गावस्कर ने उसको अपने खुद के अल्ट्रा लाइट पैड गिफ्ट कर दिए थे।

मास्टर ब्लास्टर ने कभी भी अंडर-19 टीम का हिस्सा नहीं रहे और सीधे सीनियर खिलाड़ियों में शुमार हो गए। आईए आपको बताएं क्रिकेट के भगवान बन चुके सचिन की कुछ ऐसी उपलब्धियों के बारे में जिनको लेकर उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

साल 1989:
16 साल की उम्र में सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत। श्रीकांत की कप्तानी वाली इस टीम में जगह बनाने वाले सचिन ने छह पारियों में दो अर्धशतक जड़े।

साल 1990: ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान में इंग्लैंड के खिलाफ तेंदुलकर ने अपना पहला टेस्ट शतक (नाबाद 119) जमाया।

साल 1993: तेंदुलकर का इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय सरजमीं (चेन्नई में) पर पहला टेस्ट शतक (163)

साल 1994: सिंगर कप में अपना 79वां मैच खेलते हुए सचिन का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला वनडे शतक।

साल 1996:
भारत पाकिस्तान की संयुक्त मेजबानी में हुए विश्व कप में सचिन ने दो शतक सहित 523 रन बनाए। इसके अलावा इसी साल तेंदुलकर की कप्तानी में ही भारत ने टाइटन कप हासिल किया।

साल 1997: सचिन तेंदुलकर साल के सर्वश्रेष्ठ विजडन क्रिकेटर चुने गए। इसके अलावा कप्तानी में टोरंटों में पाकिस्तान के खिलाफ सहारा कप में 4-1 से जीत दर्ज की।

साल 1998: चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तेंदूलकर के नाबाद 155 रन, जिसकी बदौलत भारत ने 179 रन से जीत दर्ज की।

साल 2001: वन डे में दस हजार रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बने।

साल 2002:
वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में 117 बना कर सर डॉन ब्रेडमैन के 29 टेस्ट शतक की बराबरी की। सचिन की रफ्तार ने थमने का नाम नहीं लिया। उन्होंने इसी साल इंग्लैंड के खिलाफ 193 बना कर ब्रेडमैन के रिकॉर्ड को पार किया।

साल 2003: आईसीसी विश्व कप के 11 मैचों में 673 बना कर टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने।

साल 2004: सुनील गावस्कर के 34 शतक के रिकॉर्ड की बराबरी और 50 मैन ऑफ द मैच हासिल करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने।

साल 2005: टेस्ट क्रिकेट में 122वें मैच में दस हजार रन पूरे किए।

साल 2006: वनडे में 14 हजार रन पूरे कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। 40 वां शतक वेस्टइंडीज के खिलाफ कुआलालम्पुर में पूरा किया।

साल 2007: 400वां वन डे खेला।

साल 2008: वनडे में 16हजार रन बनाने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने। इसी साल टेस्ट क्रिकेट में ब्रायन लारा के रिकॉर्ड (11953 रन) को पीछे छोडते हुए नए कीर्तीमान बनाए।

साल 2009: हैदराबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 175 बनाए तथा वनडे में 17 हजार  रन बनाने वाले अकेले तथा पहले खिलाड़ी बनकर उभरे।

साल 2010: वन डे में सचिन का दोहरा शतक। इससे पहले यह मुकाम किसी भी खिलाड़ी ने हांसिल नहीं किया था। इसी साल उन्होंने स्टीव वॉ के 168 टेस्ट खेलने के रिकॉर्ड को पार किया।

साल 2011: विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ पहला मैच खेलने के साथ ही वह सबसे ज्यादा वनडे खेलने वाले खिलाडी बने और सनथ जयसूर्या के 444 मैचों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।

साल 2011: विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई। भारत के लिए विश्व कप में सबसे ज्यादा 482 रन बनाने वाले बल्लेबाज बने।

साल 2012: एशिया कप में बांग्लादेश के खिलाफ 114 रन बना कर अपना सौवां शतक पूरा किया।

दिनांक 23 दिसंबर, साल 2012: भारतीय क्रिकेट के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की।

साल 2013: टी20 चैंपियंस लीग के दौरान सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के सभी प्रारूपों में 50000 रन बनाने वाले दुनिया के 16वें और एशिया के पहले क्रिकेटर बन गए।

दिनांक 10 अक्टूबर, साल 2013: सचिन तेंदुलकर का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान।

क्रिकेट की दुनिया के इस बेताज बादशाह ने उन असंभव आंकड़ों को अपनी अंगुलिओं पर नचाया है जिनको आज भी हर कोई असंभव मानता है। सचिन की खेल के प्रति श्रद्धा और समर्पण अतुलनीय रहा है। आने वाले कई सालो तक इस महान खिलाड़ी के खेल की कमी क्रिकेट जगत को खलेगी। बहरहाल आशा यह जताई जा रही है कि वह भविष्य में किसी ना किसी रूप में क्रिकेट से जुड़े रहेंगे। दुनिया के मानचित्र में भारतीयता को एक अलग पहचान दिलाने वाले इस महान खिलाड़ी को हमारा सलाम।  
(एजेंसी के साथ)

Edited by:Vikas kumar

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