विश्व शतरंज चैम्पियनशिप: सहयोगी की भूमिका

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Monday, November 04, 2013-3:33 PM

नई दिल्ली: भारतीय शीर्ष खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद और मैग्नस कार्लसन के बीच विश्व शतरंज चैम्पियनशिप के मुकाबले की उलटी गिनती शुरू हो गई है तथा शतरंज जगत में इस बात को लेकर हलचल बनी हुई है कि इन दोनों के साथ सहयोगी की भूमिका कौन निभाएगा? लेकिन सहयोगी खिलाड़ी क्या करता है? दशकों से एक अहम मैच की तैयारी के लिए अच्छी टीम तैयार करना भी उतना ही अहम है जितनी की बाजी।

 

विश्व चैम्पियन आनंद विभिन्न स्तर पर मैच खेलकर अपने अपार अनुभव से इसमें पारंगत हुए हैं। आनंद पहली बार 1990 के दशक में विश्व चैम्पियनशिप के दावेदार के रूप में खेले थे और तब से वह कई विशेषज्ञों के साथ काम कर चुके हैं। उनके सहयोगी खिलाड़ी के रूप में स्वीडन के ग्रैंडमास्टर फर्डिनैंड हेलर्स और उज्बेकिस्तान के रूस्तम कासिमजानोव अहम भूमिका निभा चुके हैं।

 

रूस के गैरी कास्पारोव के पास 1980 के दशक में और इसके बाद तक सर्वश्रेष्ठ टीम थी और वह अपने प्रतिद्वंद्वी को आसानी से बेहतरीन चाल से पस्त करते थे। वर्ष 1995 में कास्पारोव ने आनंद को गेम 10 में हराया था और अपने सहयोगी के साथ किए गए शोध से उन्होंने महज तीन मिनट में अंतिम एंडगेम जीता था।

 

आनंद मैच के दूसरे हाफ में उनके आगे कहीं नहीं टिके, जबकि वह नौ गेम के बाद बढ़त बनाए हुए थे। सहयोगी खिलाड़ी की भूमिका नये विचार लाने और उन पर तब तक काम करने की होती है, जब तक वे इस्तेमाल के योग्य नहीं हों। इसमें स्पष्ट है कि इसमें काफी मेहनत और कम्प्यूटर की काफी सहायता चाहिए होती है और मैच के दौरान 95 प्रतिशत काम दिखाई ही नहीं देता।


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