आईओसी ने भारत की मान्यता समाप्त करने की दी चेतावनी

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Saturday, November 16, 2013-4:20 PM

नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने निलंबित भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को शुक्रवार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर दस दिसंबर तक उसने अपने संविधान में संशोधन नहीं किए तो ओलंपिक आंदोलन में भारत की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। आईओसी ने आईओए से कहा था कि वह अदालत द्वारा आरोपित किए गए लोगों को चुनाव लडने से रोकने के लिए अपने संविधान में संशोधन करे।

निलंबित आईओए ने गत 27 अक्तूबर को अपनी विशेष आम बैठक में आरोपित व्यक्तियों के मामलों को नैतिक आयोग को भेजने की बात कही थी। आईओए ने साथ ही आईओसी के सदस्य रणधीर सिंह को आईओसी से बात करने के लिए अधिकृत किया था ताकि आईओए का निलंबन हटाया जा सके। लेकिन आईओसी आईओए के संविधान में संशोधन से कम किसी भी बात को मानने के लिए तैयार नहीं है।

आईओसी के महानिदेशक क्रिस्टाफ डी केपर ने आईओए पदाधिकारियों को लिखे पत्र में कहा है ‘यह तीन नवंबर को रघुनाथन के आईओसी अध्यक्ष को लिखे पत्र के संदर्भ में है जिसमें 27 अक्तूबर को हुई आईओए की बैठक का उल्लेख है। आपने आरोपित व्यक्तियों के बारे में अपने संविधान में जो संशोधन किए हैं वे आईओसी की जरुरतों के मुताबिक नहीं हैं।’ उन्होंने कहा ‘हमने पांच सिंतबर को लिखे पत्र में स्पष्ट कहा है कि अदालत द्वारा आरोपित व्यक्तियों को चुनाव लडने की अनुमति नहीं दी जाए और अगर कोई ऐसा पदाधिकारी है तो उसे अंतिम फैसला आने तक निलंबित कर दिया जाए।’

इस पत्र की एक प्रतिलिपि आईओसी अध्यक्ष थामस बाख और केन्द्रीय खेल मंत्री जितेन्द्र सिंह को भी भेजी गई है। केपर ने कहा कि अगर दस दिसंबर तक आईओए ने अपने संविधान में आवश्वक संशोधन नहीं किया तो आईओसी का कार्यकारी बोर्ड ओलंपिक आंदोलन से भारत को बाहर कर देगा। ऐसे में भारतीय खिलाडी ओलंपिक और एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।


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