‘अर्जुन को अकेला छोड़ दीजिए, उस पर अपेक्षाओं का बोझ न डालें’

  • ‘अर्जुन को अकेला छोड़ दीजिए, उस पर अपेक्षाओं का बोझ न डालें’
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Monday, November 18, 2013-2:12 PM

मुंबई: सचिन तेंदुलकर रविवार को जब अपने सन्यास और ‘भारत रत्न’ से नवाजे जाने के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए तब उनसे एक सवाल यह भी किया गया कि वह अर्जुन को किस तरह के खिलाड़ी के तौर पर देखना चाहते हैं? इसके जवाब में सचिन ने सिर्फ इतना कहा कि अर्जुन को अकेला छोड़ दीजिए और उसे अपने खेल का लुत्फ लेने दीजिए।

सचिन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अर्जुन को अकेला छोड़ दीजिए। वह क्रिकेट से बहुत प्यार करता है और मैं खुश हूं कि उसने क्रिकेट को अपने करियर के तौर पर चुना है। वह कैसा खिलाड़ी बनेगा, यह तो वक्त बताएगा लेकिन फिलहाल उस पर अपेक्षाओं का दबाव डालना ठीक नहीं।’’ सचिन ने कहा कि उनके माता-पिता ने कभी उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला और न ही उस समय मीडिया ने उन पर किसी तरह का दबाव उनके पिता और लेखक रमेश तेंदुलकर पर डाला था। और अगर डाला होता तो शायद उनके साथ में कलम होती।

सचिन ने कहा, ‘‘मैंने जब क्रिकेट खेलना शुरू किया तब तो आप में से किसी ने मेरे पिता से यह नहीं पूछा कि आखिरकार उनका लड़का क्रिकेट को खेल रहा है। कलम क्यों नहीं पकड़ रहा है। मेरे परिवार ने मुझ पर अपेक्षाओं का दबाव नहीं डाला और यही कारण है कि मैं आज यहां हूं।’’ सचिन के पुत्र अर्जुन तेंदुलकर 16 साल हैं और मुंबई क्रिकेट संघ के लिए खेलते हैं। वह मुंबई के लिए अंडर-14 खेल चुके हैं और अपने पिता के करियर के 200वें टेस्ट के पहले दिन अपनी मां और दादी के साथ ड्रेसिंग रूम में देखे गए थे लेकिन दूसरे दिन वह बॉल ब्वाय के रूप में दिखाई पड़े थे।


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