कार्लसन के खेल को समझ नहीं पाया: आनंद

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Saturday, November 30, 2013-1:45 PM

नई दिल्ली: दुनिया के नंबर एक शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन के हाथों अपना विश्व खिताब गंवाने वाले भारतीय सुपर ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने कहा है कि वह नार्वे के इस खिलाडी की खेल शैली को समझ नहीं पाए।

आनंद ने (फर्स्टपोस्ट) के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘कार्लसन ने विश्व चैंपियनशिप में मुझे चौंका दिया था। उन्होंने कुछ भी अलग नहीं किया और बस परंपरागत शैली अपनाई। अमूमन विश्व चैंपियनशिप में खिलाड़ी विपक्षी खिलाड़ी को चौंकोने के लिए कुछ अलग तरह से करने की कोशिश करते हैं लेकिन कार्लसन ने ऐसा कुछ नहीं किया।  मैं उनके साहस की दाद देता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सोचा था कि मैं उन्हें आसानी से दबाव में ला दूंगा और गलतियां करने पर मजबूर करूंगा। साथ ही मुझे लगा कि अगर वह बाजी पर अपनी पकड़ बना भी लेते हैं तो मैं उन्हें आगे नहीं निकलने दूंगा। लेकिन उनके खेलने की शैली ने मेरे लिए ऐसा करना मुश्किल बना दिया था।''

हाल में चेन्नई में खेली गई विश्व चैंपियनशिप में कार्लसन ने आनंद को दस बाजियों में 6.5, 3.5 से हराकर खिताब जीता था। टूर्नामेंट की पहली चार बाजियां ड्रा रही थी लेकिन इसके बाद आनंद को पांचवीं. छठी और दसवीं बाजी में शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

आनंद ने कहा, ‘‘मैं कह सकता हूं कि कार्लसन एक तरह से आलराउंडर हैं। वह सबकुछ सही ढंग से करते हैं और गलतियां भी करते हैं। लेकिन वह जो गलतियां करते हैं वे  उतनी बड़ी नहीं होती हैं कि विपक्षी खिलाडी उनका लाभ उठा सकें। उनकी शैली कभी-कभी गैरपरंपरागत भी होती है। कभी वह गैरपरंपरागत खेलते हैं लेकिन फिर अगली बाजी में फिर पुरानी स्थिति में लौट आते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगा कि अगर मैंने अच्छी शुरुआत की तो मैं  मैच पर पकड़ बना लूंगा। मुझे लगा कि अगर मैं अच्छी शुरुआत करूंगा तो कार्लसन को उनकी सहज स्थिति से बाहर लाकर दबाव में डाल दूंगा। मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं था कि मुझे अपने खेल के स्तर को ऊंचा करना होगा। मैंने इस पर काफी मेहनत की थी। मैं जानता था कि मेरे पास एक मौका है। हालांकि मेरा हालिया प्रदर्शन काफी अच्छा नहीं रहा था लेकिन मुझे लग रहा था कि मैं मैनेज कर लूंगा।’’

आनंद ने कहा, ‘‘शुरुआत चार बाजियां ठीकठाक रहीं। लेकिन पांचवीं बाजी में आखिरी क्षणों में की गई गलती से मुझे भारी झटका लगा। मैंने अपनी इसी कमजोरी में सुधार के लिए काफी पसीना बहाया था और जमकर तैयारी की थी लेकिन मैं इसे अमली जामा पहनाने में नाकाम रहा। नौवीं बाजी में की गई गलती से मैच में कोई फर्क पडने वाला नहीं था और यह बाजी ड्रा रही1 दसवीं बाजी में मेरे पास कुछ रह नहीं गया था।’’


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