कराटे: दुश्मन को बिना किसी हथियार से हराने की तकनीक

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Monday, January 06, 2014-2:16 PM

कराटे निहत्थे लडऩे की एक मार्शल आर्ट है। यह एक प्रकार की कला है जिसमें हाथों तथा पैरों से वार करना तथा दुश्मन के वार को रोकना शामिल होता है। जिस व्यक्ति को कराटे की तकनीक पता हो वह अपने दुश्मन को बिना किसी हथियार के हरा सकता है। एक कराटे एक्सपर्ट सामने वाले को एक ही वार में चित्त भी कर सकता है। जहां जूडो आत्मरक्षा के लिए इस्तेमाल की जाती है वहीं कराटे में दुश्मन पर वार भी किया जा सकता है। कराटे में शारीरिक संपर्क बहुत सीमित रखा जाता है और चोट से बचने के लिए वार को नियंत्रित रखा जाता है।

कराटे एक जापानी शब्द है जिसका अर्थ है ‘खाली हाथ’। कराटे में शरीर की ताकत स्ट्राइकिंग प्वाइंट पर केंद्रित की जाती है। स्ट्राइकिंग प्वाइंट में हाथ, पैर का अलग भाग, एड़ी, बाजू, घुटना तथा कोहनी शामिल होते हैं। इन सभी भागों को कड़ी मेहनत और प्रैक्टिस से कठोर बनाया जाता है। एक कराटे एक्सपर्ट कई इंच मोटी लकड़ी को अपने हाथ या पैर से तोड़ सकता है। सही टाइमिंग, कुशलता तथा जज्बा  तो इसके लिए जरूरी है ही साथ ही जरूरी होती है शारीरिक कठोरता।

कराटे के खेल में वार को शरीर के संपर्क में आने से एक इंच पहले ही रोक लिया जाता है। कराटे में मैच सिर्फ 3 मिनट के होते हैं। एक खेल  के तौर पर इसमें कुशलता का स्तर परखने के लिए दोनों में नकली लड़ाई और औपचारिक परीक्षण दोनों का आयोजन किया जाता है। यदि प्रतियोगी अच्छे से वार न कर पाए तो जज अपना फैसला मूवमैंट्स और डिफैंस तकनीक के आधार पर सुना सकते हैं।

जजों द्वारा खिलाडिय़ों के प्रदर्शन को वैसे ही रेटिंग दी जाती है, जैसे जिम्रास्टिक में होता है। कराटे एशिया में विकसित हुआ जिसे कई शताब्दियां लग गईं और 17वीं शताब्दी के दशक में जाकर यह कला के रूप में व्यवस्थित होने लगा। 1920 के दशक में यह जापान में बहुत प्रसिद्ध हुआ। आज पूरे विश्व में कई स्कूल कराटे की ट्रेंनिंग देते हैं। 1970 में कराटे वर्ल्ड चैम्पियनशिप टाइटल की स्थापना की गई थी।

प्राचीन चीन से शुरू और जापान में प्रसिद्ध हुआ युद्ध कौशल (मार्शल आर्ट) कराटे आज पूरे विश्व में अत्यधिक लोकप्रिय है। कराटे खेल भी, कला भी कराटे निहत्थे लडऩे की एक मार्शल आर्ट है। यह एक प्रकार की कला है जिसमें हाथों तथा पैरों से वार करना तथा दुश्मन के वार को रोकना शामिल होता है।

जिस व्यक्ति को कराटे की तकनीक पता हो वह अपने दुश्मन को बिना किसी हथियार के हरा सकता है। एक कराटे एक्सपर्ट सामने वाले को एक ही वार में चित्त भी कर सकता है। जहां जूडो आत्मरक्षा के लिए इस्तेमाल की जाती है वहीं कराटे में दुश्मन पर वार भी किया जा सकता है। कराटे में शारीरिक संपर्क बहुत सीमित रखा जाता है और चोट से बचने के लिए वार को नियंत्रित रखा जाता है।

कराटे एक जापानी शब्द है जिसका अर्थ है ‘खाली हाथ’। कराटे में शरीर की ताकत स्ट्राइकिंग प्वाइंट पर केंद्रित की जाती है। स्ट्राइकिंग प्वाइंट में हाथ, पैर का अलग भाग, एड़ी, बाजू, घुटना तथा कोहनी शामिल होते हैं। इन सभी भागों को कड़ी मेहनत और प्रैक्टिस से कठोर बनाया जाता है। एक कराटे एक्सपर्ट कई इंच मोटी लकड़ी को अपने हाथ या पैर से तोड़ सकता है। सही टाइमिंग, कुशलता तथा जज्बा  तो इसके लिए जरूरी है ही साथ ही जरूरी होती है शारीरिक कठोरता।

कराटे के खेल में वार को शरीर के संपर्क में आने से एक इंच पहले ही रोक लिया जाता है। कराटे में मैच सिर्फ 3 मिनट के होते हैं। एक खेल  के तौर पर इसमें कुशलता का स्तर परखने के लिए दोनों में नकली लड़ाई और औपचारिक परीक्षण दोनों का आयोजन किया जाता है। यदि प्रतियोगी अच्छे से वार न कर पाए तो जज अपना फैसला मूवमैंट्स और डिफैंस तकनीक के आधार पर सुना सकते हैं।

जजों द्वारा खिलाडिय़ों के प्रदर्शन को वैसे ही रेटिंग दी जाती है, जैसे जिम्रास्टिक में होता है। कराटे एशिया में विकसित हुआ जिसे कई शताब्दियां लग गईं और 17वीं शताब्दी के दशक में जाकर यह कला के रूप में व्यवस्थित होने लगा। 1920 के दशक में यह जापान में बहुत प्रसिद्ध हुआ। आज पूरे विश्व में कई स्कूल कराटे की ट्रेनिंग देते हैं। 1970 में कराटे वर्ल्ड चैम्पियनशिप टाइटल की स्थापना की गई थी।

प्राचीन चीन से शुरू और जापान में प्रसिद्ध हुआ युद्ध कौशल (मार्शल आर्ट) कराटे आज पूरे विश्व में अत्यधिक लोकप्रिय है।
 


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