'पावरगेम नहीं, कौशल पर ध्यान दें भारतीय'

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Monday, January 13, 2014-2:03 PM

नई दिल्ली: आल इंग्लैंड क्लब के मुख्य कोच डैन ब्लॉक्सैम का मानना है कि भारतीयों को लिएंडर पेस की तरफ विश्व टेनिस पर अपनी छाप छोडऩे के लिए पावरगेम पर नहीं बल्कि अपनी नैसर्गिक प्रतिभा और कौशल और ध्यान देना चाहिए। इस ब्रिटिश का मानना है कि भारतीयों को पावरगेम का जवाब देने के लिए नैसर्गिक कौशल को विकसित करना चाहिए।

ब्लॉक्सैम ‘रोड टू विंबलडन’ कार्यक्रम के तहत भारत आए हुए हैं। उनका मानना है कि यूरोपीय देशों के मजबूत और लंबे कद के खिलाडिय़ों का जवाब पावरगेम से देना भारतीयों के लिए व्यर्थ होगा। उन्होंने कहा, ‘‘आप पावर का जवाब पावर से कैसे दे सकते हो। यदि आपका शरीर किसी अलग आकार है तो फिर शायद यह संभव नहीं है। भारतीय और ब्रिटिश बच्चों का आकार एक जैसा होता है। हम पूर्वी यूरोपियन की तरह बड़ी कद काठी के नहीं हैं। कुछ अमेरिकी खिलाड़ी वास्तव में बहुत लंबे और मजबूत कद काठी के है। इसलिए कुछ वास्तव में मजबूत खिलाड़ी हैं। जैसे कि विलियम्स बहनें (सेरेना और वीनस), विक्टोरिया अजारेंका, मारिया शारापोवा, ये सभी शारीरिक रूप से काफी मजबूत हैं।’’

ब्लॉक्सैम ने कहा, ‘‘स्पिन और हस्तकौशल भारतीय खिलाडिय़ों का असली कौशल है। उन्हें सेरेना की तरह खेलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि वे सेेरेना की तरह नहीं बने हुए हैं।’’ भारत में पुरुष और महिलाओं की औसत लंबाई पांच फीट पांच इंच होती है जबकि ब्रिटेन में पुरुषों की पांच फीट 9.6 इंच और महिलाओं की पांच फीट 4.4 इंच होती है। ब्लॉक्सैम ने कहा, ‘‘उन्हें अपने कौशल का बेहतर उपयोग करना होगा। उन्हें कोर्ट के कोण का बेहतर उपयोग करना चाहिए। उन्हें तेजी का जवाब तेजी से देने के बजाय अलग तरह से खेलने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि यदि कोई लंबा और मजबूत है तो फिर उसके पावरगेम की बराबरी नहीं की जा सकती।’’

ब्लॉक्सैम ने लिएंडर पेस का उदाहरण दिया जो 40 साल के होने के बावजूद अब भी ग्रैंडस्लैम जीत रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आपको रचनात्मक होने की जरूरत है और लिएंडर इसका अच्छा उदाहरण है जो अब भी खेल रहा है क्योंकि उसके पास कला और कौशल है। वह खेल का स्वरूप बदलने और उसको अपने अनुरूप ढालने में माहिर है।’’ ब्लॉक्सैम ने कहा, ‘‘युवा खिलाड़ी नहीं समझ पाते कि लिएंडर की सर्विस को कैसे ब्रेक करना है क्योंकि एक बार वह स्पिन के साथ हिट करते हैं तो कभी करारा शाट जमाते हैं। कभी डीप वॉली लगाते हैं तो कभी ड्राप वॉली। इसलिए भारतीय खिलाडिय़ों के लिए मेरा यही कहना है कि वे अपनी नैसर्गिक प्रतिभा को निखारें।’’


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