भारत के सामने कड़ी चुनौती, न्यूजीलैंड के खिलाफ करो या मरो का मुकाबला

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Friday, January 24, 2014-12:21 PM

आकलैंड: लगातार दो हार के बाद भारतीय क्रिकेट टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला में बने रहने के लिए कल होने वाला तीसरा एक दिवसीय मैच हर हालत में जीतना होगा और उसके लिए सही टीम संयोजन को उतारना जरुरी है। पहले दो मैच हारकर नंबर वन की रैंकिंग गंवाने वाली भारतीय टीम अपनी गलतियों से सबक लेकर उतरना चाहेगी क्योंकि पांच मैचों की श्रृंखला में बने रहने का यह उसके पास आखिरी मौका है।

यदि भारत कल नहीं जीत पाता है तो उपमहाद्वीप के बाहर दक्षिण अफ्रीका के हाथों मिली हार के बाद यह उसकी लगातार दूसरी शिकस्त होगी। भारत को नेपियर में पहले वन डे में 24 रन से पराजय झेलनी पड़ी जबकि हैमिल्टन में दूसरा वन डे डकवर्थ लुईस प्रणाली के आधार पर उसने 15 रन से गंवाया। इसके साथ ही वन डे रैंकिंग में वह नंबर वन के स्थान से भी खिसक गया। धोनी एंड कंपनी ने उपमहाद्वीप के बाहर पिछले पांच में से चार वन डे गंवाए हैं। इससे विदेशी पिचों पर भारतीयों की कई कमजोरियां उजागर हुई है।

आर अश्विन को दोनों मैचों में एक भी विकेट नहीं मिला लेकिन दोष अकेले उन्हीं का नहीं है। धोनी अपने मुख्य गेंदबाजों से छोटे स्पैल कराते हैं और उनसे पावरप्ले तथा डैथ ओवरों में भी गेंदबाजी कराई जाती है। बीच के ओवरों में विकेट लेने की बजाय बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने की भारत की रणनीति नाकाम रही है क्योंकि 35वें ओवर से पहले अधिक विकेट गिरे ही नहीं है। नेपियर में 35 ओवर से पहले सिर्फ तीन विकेट गिरे। हैमिल्टन में भी हालात ऐसे ही थे।

अश्विन ने पिछले पांच मैचों में 5.89 की औसत से रन दिए हैं जबकि ईशांत शर्मा (छह विकेट) ने चार मैचों में 6.12 प्रति ओवर की दर से रन लुटाए। रविंद्र जडेजा ने छह रन प्रति ओवर के हिसाब से रन दिए और भुवनेश्वर कुमार का औसत तीन मैचों में 5.73 प्रति ओवर रहा है। मोहम्मद शमी ने 6.70 प्रति ओवर के हिसाब से रन दिए। ईडन पार्क मैदान का छोटा आकार भारतीय बल्लेबाजों के लिए खुशी की बात होना चाहिए लेकिन वे भी खराब दौर में हैं।

सलामी बल्लेबाज शिखर धवन और रोहित शर्मा टीम को अच्छी शुरुआत देने में नाकाम रहे हैं। अब तक उनकी सर्वश्रेष्ठ सांझेदारी 22 रन की रही है। घरेलू मैदानों पर कामयाब रहे धवन और रोहित दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड में लय हासिल करने के लिए जूझते दिख रहे हैं। रोहित खुलकर खेल पाने में नाकाम रहे हैं चूंकि तेज गेंदबाजों के अनुकूल हालात में नई गेंद पारी की शुरुआत में उन्हें परेशान करती रही है। वहीं दक्षिण अफ्रीका में उछाल से परेशान रहे धवन यहां गैर जिम्मेदाराना शाट खेलकर अपना विकेट गंवा बैठे।

पिछले साल 22 मैचों में 1247 रन जोडऩे वाली इस जोड़ी के उपमहाद्वीप के बाहर नाकाम रहने से कई सवाल उठने लगे हैं। चौथे नंबर पर अजिंक्य रहाणे ने दूसरे वन डे में विराट कोहली के साथ तीसरे विकेट के लिए 90 रन जोड़े। यह बड़ा स्कोर तो नहीं है लेकिन भारतीय खेमे ने राहत ली होगी कि कोहली और धोनी के अलावा किसी और ने भी रन बनाए हैं। दक्षिण अफ्रीका दौरे के बाद युवराज सिंह को बाहर किये जाने से सुरेश रैना पर काफी दबाव था और वह बुरी तरह फ्लाप रहे हैं।


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