आसान नहीं है केशवन की राह

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Friday, February 07, 2014-4:41 PM

सोच्चि: सोच्चि शीतकालीन खेलों में तिरंगे के बिना उतर रहे तीन सदस्यीय भारतीय दल में शिवा केशवन से भारतीयों को पदक की सबसे ज्यादा उम्मीद है लेकिन पश्चिमी देशों के दबदबे वाले इन खेलों में उनकी राह आसान कई नहीं है। सोच्चि ओलंपिक में ल्यूज स्पदर्धा का आयोजन सबसे पहले हो रहा है और गुरवार तक इसके एकल, युगल और टीम स्पर्द्धाएं समाप्त हो जाएंगी। केशवन ल्यूज में दावा पेश करेंगे लेकिन भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की मान्यता निलंबित होने के कारण वह तिरंगे के तले नहीं खेल पाएंगे।

 

केशवन ने 17 साल पहले पहली बार नगानो ओलंपिक में हिस्सा लिया था और वह भारत के सबसे सफल ल्यूज पायलट हैं। तब उनकी उम्र 16 साल थी और वह ल्यूज स्पर्द्धाएं में उतरने वाले देश के पहले और सबसे युवा खिलाडी थे। मनाली में जन्मे केशवन की मां इतालवी मूल की हैं। उन्हें इटली की तरफ से ओलंपिक में खेलने की पेशकश मिली थी जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। केशवन ने मनाली में ही 15 साल की उम्र में ल्यूज का अभ्यास किया था।

 

अपने पहले ओलंपिक में वह 28वें स्थान पर रहे थे जबकि 2002 में साल्ट लेक में &&वें. 2006 में ट्यूरिन में 25वें और 2010 में वेंकूवर ने वह दो रन में क्रमश: 31वें और 28वें स्थान पर रहे। केशवन के नाम एशिया में 143.3 किमी प्रति घंटे का स्पीड रिकार्ड और 49.590 सेकेंड का ट्रैक रिकार्ड है। उन्होंने 2011 और 2012 में एशिया कप में स्वर्ण पदक जीते हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2009 में एल्टेनगर्ग में नेशंस कप में 14वां स्थान है। केशवन पदक जीतने का लक्ष्य लेकर ओलंपिक में पहुंचे हैं लेकिन उनकी राह कतई आसान नहीं है।


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