विजयी लय बरकरार रखने उतरेगा भारत

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Friday, February 28, 2014-7:32 AM

फातुल्ला : एशिया कप में 5 बार की विजेता टीम भारत भले ही टूर्नामैंट की सबसे सफल टीमों में से है लेकिन शुक्रवार को उसका मुकाबला श्रीलंका से है जो खुद भी 4 बार यहां खिताब जीत चुकी है। ऐसे में जरूरी है कि युवा खिलाडिय़ों से सजी टीम इंडिया का हर खिलाड़ी जीत के लिए ‘विराट’ भूमिका निभाए। भारत अपनी विजयी लय को बरकरार रखने के लिए उतरेगा। भारत ने बुधवार को मेजबान बंगलादेश के खिलाफ अपने पहले मैच में 6 विकेट से जीत दर्ज की थी। टीम इंडिया को मनोबल बढ़ाने के लिए इस जीत की सख्त जरूरत भी थी लेकिन शुक्रवार को उसका मुकाबला श्रीलंका जैसी मजबूत टीम से होना है। भारत और श्रीलंका दोनों ने ही टूर्नामैंट में विजयी आगाज किया है और दोनों ही हर हाल में अपने विजयी अभियान को आगे ले जाने के लिए भरसक प्रयास करेंगी। भारत ने जहां बंगलादेश को हराया है तो श्रीलंका ने अपने ओपङ्क्षनग मैच में गत विजेता पाकिस्तान को 12 रनोंं से हराया था।

भारतीय टीम के पास जहां पिछले मैच के शतकधारी विराट कोहली, अजिंक्या रहाणे, शिखर धवन, रोहित शर्मा, दिनेश काॢतक, मोहम्मद शमी, भुवनेश्वर कुमार जैसे चुङ्क्षनदा खिलाड़ी हैं वहीं श्रीलंका के पास बल्लेबाजों की कमर तोड़ देने वाले लसिथ मङ्क्षलगा सरीखे गेंदबाज और अकेले दम पर मैच जिताने वाले लाहिरू थिरिमाने, कुशाल परेरा और कुमार संगाकारा जैसे खिलाडिय़ों की फौज है। यदि एशिया कप में भारत और श्रीलंका के पिछले रिकार्ड को देखें तो यह बेहद ही दिलचस्प है कि दोनों टीमें एक साथ कुल 8 बार फाइनल में एक साथ पहुंच चुकी हैं। 1984 में यू.ए.ई. में भारत और श्रीलंका के बीच फाइनल मुकाबला खेला गया था। इसके बाद 1988 में बंगलादेश में ही खेले गए एशिया कप टूर्नामैंट में भी दोनों टीमें फाइनल तक पहुंची थीं।

तीसरी बार 1990-91 में भारत में टूर्नामैंट का आयोजन हुआ और फिर खिताबी जंग दोनों टीमों के बीच हुई जबकि चौथी बार 1995 में, 5वीं बार 1997 में, छठी बार 2004 में, 7वीं बार 2008 में और 8वीं तथा आखिरी बार भारत और श्रीलंका 2010 में एशिया कप का फाइनल खेल चुकी हैं। इनमें भारत का रिकार्ड बेहतरीन रहा और उसने 5 बार जीत दर्ज की है जबकि श्रीलंका ने 3 बार भारत को हराकर खिताब जीता है। ऐसे में यदि देखा जाए तो दोनों ही टीमों के बीच मुकाबला बराबरी का है। दोनों ही टीमों के खिलाडिय़ों के  लिए  जीत दर्ज करना कड़ी चुनौती होगी। हालांकि भारत को अब भी खेल के दोनों विभागों में सुधार करने की सख्त जरूरत है। बंगलादेश जैसी कमजोर टीम के सामने भी भारतीय टीम को कुछ संघर्ष जरूर करना पड़ा था। गेंदबाजों में जहां केवल मोहम्मद शमी ही सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने 50 रन पर सर्वाधिक 4 विकेट लिए लेकिन भुवनेश्वर कुमार को 41 रन पर 1 विकेट मिला जबकि वरुण आरोन ने 7.5 ओवरों में ही सबसे ज्यादा 74 रन लुटा दिए। रविचंद्रन अश्विन की गेंदबाजी भी संतोषजनक नहीं रही और डन्होंने 50 रन पर 1 विकेट निकाला।


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