गावस्कर खुद क्यों नहीं बनते कोच!

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Wednesday, March 12, 2014-4:51 AM

नई दिल्ली : दुनिया के सबसे सफल ओपनर और तकनीक के महारथी सुनील गावस्कर ने टीम इंडिया के हाल के निराशाजनक प्रदर्शन पर कोच डंकन फ्लेचर को बाहर करने की वकालत करते हुए राहुल द्रविड़ का नाम कोच के लिए सुझाया है लेकिन यह भी एक प्रश्न है कि गावस्कर खुद अपने बारे में कोच पद के लिए क्यों नहीं सोचते?

पूर्व भारतीय कप्तान गावस्कर को विदेशी जमीन पर तेज गेंदबाजी को खेलने वाला सबसे सफल बल्लेबाज माना जाता है। उनकी ठोस तकनीक की पूरी दुनिया मुरीद थी। मौजूदा समय में वह खेल के सबसे बड़े विश्लेषक हैं और गावस्कर जब कोई बात कहते हैं तो पूरी दुनिया उसे बड़े ध्यान से सुनती है। भारत की पिछले 3 वर्षों में विदेशी जमीन पर नाकामयाबी में बल्लेबाजों का फ्लाप प्रदर्शन सबसे बड़ा कारण रहा है। भारतीय बल्लेबाज इंगलैंड, आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका की उछाल वाली तेज पिचों पर लगातार संघर्ष करते रहे हैं। उन्हें एक ऐसे कोच की जरूरत है जो ऐसी पिचों पर उन्हें सही तकनीक से खेलने का पाठ पढ़ा सके। इस मामले में गावस्कर से बेहतर कोई और नहीं हो सकता है। गावस्कर ने 1971 में वैस्टइंडीज दौरे में अपनी पहली ही सीरीज में 774 रन बनाए थे जो भारतीय क्रिकेट में आज भी रिकार्ड बना हुआ है। गावस्कर के इस रिकार्ड को उसके बाद 43 वर्षों में कोई भी भारतीय बल्लेबाज नहीं तोड़ पाया है। यहां तक कि बल्लेबाजी के बादशाह सचिन तेंदुलकर 200 टैस्ट के अपने पूरे करियर में कभी एक सीरीज में 500 रन का आंकड़ा पार नहीं कर पाए।

यह तथ्य इस बात का गवाह है कि गावस्कर अपने समय में वैस्टइंडीज और आस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजों के सामने कितना सफल रहे थे। गावस्कर ने हालांकि जब राहुल द्रविड़ का नाम सुझाया तो इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि द्रविड़ तकनीक के मामले में गावस्कर की बराबरी करते हैं।  गावस्कर ने 2015 में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में खेले जाने वाले आई.सी.सी. विश्वकप से पूर्व फ्लैचर की जगह टीम में किसी युवा कोच को शामिल किए जाने की वकालत की है लेकिन यह ध्यान देने की जरूरत है कि अगला विश्वकप आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की जिन पिचों पर खेला जाना है वे तेजी, उछाल और सिं्वग के लिए मशहूर हैं और ऐसी पिचों पर टीम इंडिया की बल्लेबाजी कमजोरी दिखती है।  यहां एक ऐसे कोच की जरूरत है जो मौजूदा भारतीय बल्लेबाजों को तकनीकी रूप से सक्षम कर सके। द्रविड़ भी यह काम कर सकते हैं लेकिन गावस्कर उनसे भी ज्यादा बेहतर यह काम कर सकते हैं।

भारतीय क्रिकेट में आमतौर पर देखा गया है कि सीनियर खिलाड़ी टीम इंडिया का कोच बनने से झिझकते हैं। विश्वकप विजेता कप्तान कपिल देव को सितम्बर 1999 में सचिन तेंदुलकर को भारतीय कप्तान बनाए जाने के बाद कोच नियुक्त किया गया था लेकिन कपिल का कार्यकाल लंबा नहीं चला था। पूर्व क्रिकेटर और अब मशहूर कमैंटेटर रवि शास्त्री एक समय सिर्फ एक सीरीज के लिए कोच पद संभालने को तैयार हुए थे।  कपिल की विश्वकप विजेता टीम के सदस्य और आलराऊंडर मोङ्क्षहद्र अमरनाथ ने कोच पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बी.सी.सी.आई.) ने उन्हें नकारते हुए आस्ट्रेलिया के ग्रेग चैपल को टीम इंडिया का कोच बनाया था। कई पूर्व भारतीय क्रिकेटर इस बात की वकालत करते हैं कि टीम इंडिया को विदेशी नहीं बल्कि भारतीय कोच की जरूरत है। लेकिन विडम्बना यह है कि बी.सी.सी.आई. भारतीय कोचों के मुकाबले विदेशी कोचों को ज्यादा प्राथमिकता देती है। 

बंगलादेश में 16 मार्च से शुरू होने वाले ट्वैंटी-20 विश्वकप में भारतीय टीम के प्रदर्शन के बाद यह स्थिति साफ हो जाएगी कि फ्लेचर भारत में बने रहेंगे या नहीं या फिर बी.सी.सी.आई. एकदिवसीय विश्वकप के लिए नए कोच की तलाश शुरू करेगा। गावस्कर दूसरे खिलाडिय़ों का तो नाम सुझाते हैं लेकिन भारतीय क्रिकेट के लिए यह बड़ा अच्छा होगा यदि दूसरे बड़े क्रिकेटर गावस्कर का नाम कोच पद के लिए सुझाएं।


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