आलोचनाओं पर फिर भारी पड़े धोनी

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Sunday, April 06, 2014-9:34 AM

नई दिल्ली: क्रिकेट और राजनीति इतनी अनिश्चितताओं से भरा हुआ है कि कुछ भी पहले से कह पाना बेहद मुश्किल होता है। अगर आपकी भविष्यवाणी सही साबित होती है तो आप अनायास ही बोल उठते हैं, मैंने तो पहले ही कह दिया था। लेकिन जब आप गलत साबित होते हैं, तब भी अपने तर्क को आप नई परिस्थितियों और भाग्य के आधार पर सही ठहरा सकते हैं।

बांग्लादेश में चल रहे आईसीसी टी20 विश्वकप के तहत शुक्रवार को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए मुकाबले के बीच एफएम रेडियो चैनलों पर विशेषज्ञ भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की उनकी गलतियों के लिए खूब लानत-मलामत कर रहे थे। कुछ ने तो भारत को मैच में मुकाबले से काफी पीछे बता दिया तो कुछ ने बीच का रास्ता अपनाते हुए दोनों टीमों के लिए मैच को बराबरी की टक्कर वाला बताया। लेकिन दक्षिण अफ्रीका पर भारत की एक ओवर शेष रहते छह विकेट से शानदार जीत कहीं से भी संयोगपूर्ण नहीं थी।

धोनी पर लगे कुछ ठीक आरोपों में शानदार फॉर्म में चल रहे मोहम्मद शमी की जगह चेन्नई सुपर किंग्स के अपने साथी खिलाड़ी मोहित शर्मा को इस महत्वपूर्ण मैच के लिए चुनना था। एक अन्य खेल पंडित ने सेमीफाइनल मैच में शिखर धवन को न चुनने के धोनी के फैसले पर नाराजगी जाहिर की थी। इसके अलावा कुछ विशेषज्ञों ने मैच के दौरान रविचंद्रन अश्विन से नई गेंद से आक्रमण न करवाने के धोनी के फैसले पर अचरज व्यक्त किया था, क्योंकि अब तक नई गेंद से अश्विन काफी सफल रहे थे। वास्तव में खेल प्रशंसकों और विशेषज्ञों के पास धोनी की अकल्पनीय कप्तानी शैली पर लगाने के लिए और भी बहुत से आरोप निकाले जा सकते हैं और थे।

और अंत में उनके पास कम से कम यही कहने के लिए बच ही जाता है कि जीत जाने पर धोनी के गलत फैसलों पर बात ही नहीं होगी। उनके आरोपों-प्रत्यारोपों की फेहरिश्त खत्म ही नहीं होती। ऐसा नहीं है कि धोनी सभी सही फैसले लेते हैं और ऐसा भी नहीं है कि खुद धोनी से गलतियां नहीं होतीं, लेकिन कम से कम उन्हें अपने निर्णयों के पीछे के कारण बताने का अवसर तो जरूर मिलना चाहिए।

संयोग से मैच के बाद धोनी से अश्विन को नई गेंद न दिए जाने का सवाल पूछ ही लिया गया। इस पर धोनी ने जो वजह बताई उसे कहीं से भी गलत नहीं ठहराया जा सकता। धोनी ने बताया कि वह अश्विन से बीच के ओवरों में गेंदबाजी करवाना चाहते थे, ताकि अब्राहम डिविलियर्स जैसे विस्फोटक बल्लेबाज को बांधा जा सके, जबकि तेज गेंदबाजों के पिटने की पूरी संभावना हो सकती थी। धोनी की इस रणनीति ने काम भी किया और डिविलियर्स को अश्विन ने अपनी फिरकी में फंसा ही लिया।

निश्चित तौर पर अगर धोनी की यह रणनीति काम नहीं करती तो उन्हें कहीं अधिक आलोचना झेलनी पड़ती। वास्तव में हर रणनीति हमेशा कारगर नहीं हो सकती। हालांकि धोनी के आलोचकों के पास अभी भी धोनी पर लगाने के लिए यह आरोप है कि वह सिर्फ सिमित ओवरों में ही सफल हैं, क्योंकि वह एक बेहतरीन मैच जिताऊ खिलाड़ी हैं।

लेकिन सोचिए, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे सेमीफाइनल में बराबरी पर पहुंच चुकी भारतीय टीम की तरफ से धोनी टूर्नामेंट में पहली बार मैदान पर बल्लेबाजी करने पहुंचते हैं और सिर्फ एक गेंद खेल पाते हैं। ऐसा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि विराट कोहली ने एक गेंद पहले ही मैच जिताऊ शॉट नहीं लगाया था। अगला ओवर डेल स्टेन जैसे गेंदबाज का होने के बावजूद धोनी वह एक गेंद आराम से खेल जाते हैं और विनिंग शॉट लगाने का मौका कोहली को देते हैं। यह भारत की मजबूत बल्लेबाजी को ही दर्शाता है।

इस मैच को जिताने में वास्तव में धोनी के दो सबसे विश्वसनीय खिलाडिय़ों अश्विन और कोहली का योगदान रहा। अश्विन, कोहली के साथ संयुक्त रूप से प्लेयर ऑफ द मैच के हकदार थे। अश्विन ने दक्षिण अफ्रीका के तीन सबसे अहम खिलाडिय़ों, हाशिम अमला, फाफ डू प्लेसिस और डिविलियर्स को पवेलियन भेजा। अश्विन की जिस गेंद पर अमला आउट हुए उसे आस्ट्रेलिया के महान खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट ने ‘टी-20 डीलिवरी ऑफ द सेंचुरी’ कह डाला।

धोनी अपने साथी खिलाडिय़ों पर न तो मैदान से बाहर और न ही मैदान के अंदर किसी तरह का दबाव डालते नजर आए हैं। वे हमेशा साथी खिलाडिय़ों को सहजता से अपना स्वाभाविक खेल खेलने का मौका देते देखे जा सकते हैं। कोहली को इस सहजता में बिना हड़बड़ाए अपने बल्लेबाजी करते देखना इसीलिए सुखद लगता है।

कोहली और रैना जब क्रीज पर टिके हुए थे तो वे हड़बड़ी में तो एकदम नजर नहीं आ रहे थे, पर उनका लक्ष्य उसी समय टीम को 19वें ओवर में ही जीत दिला देना था। खासकर कोहली डेल स्टेन के अंतिम ओवर में लक्ष्य का पीछा नहीं करना चाहते थे। उनके धैर्य ने उन्हें वांछित परिणाम भी दिया और अब भारत एक बार फिर फाइनल में है, जहां उसका सामना श्रीलंका से होना है। दोनों ही टीमें रनों का पीछा करने में माहिर हैं, ऐसे में कप्तान धोनी के निर्णय पर निश्चित तौर पर फिर से सबकी निगाहें रहेंगी।

भारत अगर यह फाइनल मैच जीत जाती है, तो वे अपना क्रिकेट स्लैम (विश्वकप, चैम्पियंस ट्रॉफी और टी-20 विश्वकप) पूरा करने में कामयाब हो जाएंगे।


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