रणजी ट्राफी पर मंडराए खतरे के बादल 

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Friday, October 07, 2016-8:30 AM

नई दिल्ली: बीसीसीआई भारत के प्रमुख घरेलू टूर्नामैंट रणजी ट्राफी को उसके पहले दौर के तीसरे दिन यानि शनिवार से बंद कर सकता है क्योंकि लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुसार अधिकतर वर्तमान पदाधिकारियों को अपने पद छोड़ने पड़ सकते हैं।  

अब तक 18 राज्य इकाईयों ने कोष नहीं मिलने पर घरेलू मैचों के आयोजन में असमर्थता जताई है। बीसीसीआई के सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने यह बात उच्चतम न्यायालय के सामने रखी।  शीर्ष अदालत का फैसला कल आएगा और विश्वस्त सूत्रों के अनुसार 83वीं रणजी ट्राफी पर इसका सबसे बुरा प्रभाव पड़ सकता है। 

सूत्रों ने कहा कि इसकी पूरी संभावना है कि रणजी ट्राफी को तीसरे दिन से ही रोक दिया जाए। यदि बोर्ड ही नहीं रहेगा तो फिर ऐसी स्थिति में मैचों का आयोजन कैसे हो सकता है। केवल रणजी ट्राफी ही नहीं बल्कि सीनियर और जूनियर महिला चैंपियनशिप, अंडर 23, अंडर-19 और अंडर-16 चैंपियनशिप भी इसमें शामिल हैं। बीसीसीआई के इन मैचों को सही तरह से चलाने के लिए आपको पैसे की जरूरत पड़ती है। 

उन्होंने कहा कि यदि पूर्व मुख्य न्यायाधीश के अगुवाई वाली लोढ़ा समिति सदस्यों को सिफारिशें स्वीकार करने के लिए दबाव नहीं डाल सकती तो फिर आपको क्या लगता है कि बीसीसीआई अध्यक्ष के लिए यह संभव है कि वह उन्हें इन सिफारिशों को मानने के लिये मजबूर करें। हां रणजी ट्राफी पर खतरा मंडरा रहा है। 
 


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