BCCI को SC से झटका, बोर्ड और स्‍टेट एसोसिएशन्‍स के बीच पैसे के लेन-देन पर रोक

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Friday, October 21, 2016-2:27 PM

नई दिल्‍ली : बीसीसीआई और उसकी मान्य ईकाइयों में में जस्टिस लोढ़ा समिति की सिफारिशें के अनुसार सुधार लागू करने को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से बोर्ड को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर आज सख्त रुख अपनाया है। जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट ने आज निर्देश दिया कि जब तक राज्य क्रिकेट संघ लोढ़ा समिति की सिफारिशों को नहीं मानते हैं तब तक वे बीसीसीआई से कोई पैसा नहीं ले सकते। 

सिफारिशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने BCCI के खिलाफ की थी कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने आज दिए अपने अहम आदेश से साफ कर दिया है कि बीसीसीआई को लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करके क्रिकेट में फैली गंदगी को दूर करना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को सिफारिशें लागू करने के लिए दो हफ्ते की समयसीमा दी है। लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने साथ ही लोढ़ा पैनल से कहा है कि बीसीसीआई के खातों की जांच के लिए वह एक ऑडिटर (लेखाकार) की नियुक्ति करे। कोर्ट ने कहा है कि किसी को भी अब पैसे नहीं दिए जाएंगे। बाकी चीजें बाद में देखी जाएंगी।
खंडपीठ ने दिया यह आदेश
न्यायालय ने कहा था कि जिन राज्य संघों को पैसा जारी किया जा चुका है, वे उसे तब तक खर्च नहीं करेंगे जब तक वे इन सिफारिशों को मान नहीं लेते।  खंडपीठ ने आज के आदेश में भी इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य क्रिकेट संघों को एक भी पैसा तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक वे लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर अमल नहीं कर लेते। बोर्ड इस पर अमल के संबंध में दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करे। बोर्ड इस बात को लेकर भी हलफनामा देगा कि वह किस प्रकार से लोढा समिति की सिफारिशों पर अमल करेगा? 

5 दिसंबर को होगी  अगली सुनवाई
इस मामले पर अब अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी। अदालत के इस आदेश के बाद बीसीसीआई अब राज्य क्रिकेट संघों को ताजा कोष जारी नहीं कर सकेगा, वहीं उसके बड़े करारों पर भी समिति की नजर रहेगी।  बोर्ड का अगला बड़ा करार इंडियन प्रीमियर लीग का प्रसारण अधिकार होगा जिसपर 25 अक्टूबर तक कोई फैसला आ सकता है। अदालत ने 17 अक्टूबर को लोढा समिति की स्थिति रिपोर्ट पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और शुक्रवार को उन्होंने इस पर अपना निर्णय सुनाया।  लोढा समिति ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों को हटाकर प्रशासकों का एक दल नियुक्त किया जाना चाहिए, क्योंकि मौजूदा अधिकारी समिति की सिफारिशों को लागू करने में बाधा डाल रहे हैं। 

अदालत बीसीसीआई के ऐसा उठा सकती है कदम
इस पर अदालत ने कहा था कि बीसीसीआई के अधिकारियों को हटाने जैसा कदम आखिरी और सबसे सख्त कदम होगा। अदालत ने न्यायमित्र गोपाल सुब्रह्मण्यम से उन उपायों के बारे में पूछा था जिससे कि बोर्ड और उसके राज्य संघ सिफारिशों को लागू कर सकें।  सुब्रह्मण्यम का सुझाव था कि जब तक सिफारिशों को लागू न किया जाए तब तक राज्य संघों को दिया जाने वाला धन रोक दिया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि भविष्य के बीसीसीआई अनुबंध में इस बात को शामिल किया जाए कि लोढा समिति की सिफारिशों का पालन करना अनिवार्य होगा। 

उल्लेखनीय है कि बीसीसीआई ने अब तक उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त लोढा समिति की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने में असमर्थता जताई है। बोर्ड का कहना है कि उसके अधिकतर मान्यता प्राप्त क्रिकेट संघ सिफारिशों को लेकर आम सहमति नहीं बना पाए हैं। बीसीसीआई मुख्य रूप से एक राज्य एक वोट और प्रशासकों की उम्र 70 वर्ष तक सीमिति करने और उनके पद पर बने रहने की समय सीमा तय करने जैसी सिफारिशों का विरोध कर रहा है। 


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