ये हैं फुटबॉल इतिहास के सबसे खतरनाक खिलाड़ी

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Monday, November 21, 2016-9:42 PM

नई दिल्ली: फुटबॉल का जुनून भी लोगों के सिर पर उसी तरह चढ़ा हुआ है जैसे क्रिकेट का। लेकिन फुटबॉल को दुनिया मेें लोकप्रिय करने के लिए अहम भूमिका पुराने खिलाडिय़ों की खूब रही है। आज हम उन दमदार खिलाडिय़ों के बारे में आपको बताएंगे जिन्होंने फुटबॉल गेम को आसमान तक पहुंचा दिया। 

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पेले ने खेल में दिया नया रूप
फुटबॉल की दुनिया की दो यादगार घटनाएं लगभग एक साथ हुई। एक लाजवाब टैलेंट ने इस खेल में दस्तक दी और ब्राजील की टीम उभरकर सामने आई। 17 साल के पेले आए और खेल का एक नया ही रूप सामने लाए। 1958 में जब पहली बार ब्राजील चैंपियन बना तो उसमें इस महान सितारे की अहम भूमिका थी। सेमीफाइनल में पेले ने हैट्रिक गोल दागे और उसके बाद फाइनल में 2 गोल दागे। चोट की वजह से वो 1962 वल्र्ड कप नहीं खेल पाए। 1966 में भी विरोधी टीमों ने उनपर जबर्दस्त अटैक किए और उन्हें घायल कर दिया। उसके बाद भी 1970 में ब्राजील एक बार फिर चैंपियन बना।

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दिएगो माराडोना
1986 में हुए मैक्सिको वल्र्ड कप में दिएगो माराडोना की धूम देखने को मिली। दिएगो अर्मांडो माराडोना  आर्जेंटीना के लिए माराडोना ने लगभग अकेले दम पर वल्र्ड कप जिताया। विरोधी टीम के खिलाडिय़ों ने माराडोना पर जमकर हमले किए, लेकिन सबको नाकाम करते हुए आखिरकार वो टीम को चैंपियन बनाने में कामयाब हुए। हैंड ऑफ गोल के विवाद के बावजूद माराडोना आलोचकों को अपने स्टाइल में जवाब देते गए। उसी मैच में माराडोना ने 60 मीटर की दूरी से आकर गोल दागा।

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ब्लैक पैंथर
1966 में पेले तो नहीं खेल पाए लेकिन एक और महान खिलाड़ी ने इसी वल्र्ड कप में दस्तक दी। ब्लैक पैंथर के नाम से मशहूर इयूसेबियो मोजांबिक के एक गरीब परिवार से थे। लेकिन प्रतिभा कूट-कूट कर भरी थी। 1965 के बैलेन डीओर विजेता यूसेबियो ने अकेले दम पर पुर्तगाल को वल्र्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचाया। उत्तर कोरिया के खिलाफ क्वार्टरफाइनल में पुर्तगाल 3 गोल से पीछे चल रहा था, लेकिन आखिरी 30 मिनट में पुर्तगाल ने 4 गोल दागकर मैच में वापसी की।


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पाओलो रोसी
स्पेन में हुए 1982 वल्र्ड कप में भी बेहद यादगार लम्हा आया, जब पाओलो रोसी बेटिंग स्कैंडल से उबरकर इटालियन फुटबॉल के सबसे बड़े हीरो बने। रोसी टोटोनेरो फिक्सिंग स्कैंडल में फंस गए थे। इस मामले की वजह से 1980 में उनपर बैन भी लग गया। हालांकि बाद में बुजरोट की कप्तानी में उन्हें इटली की वल्र्ड कप की टीम में एक बार फिर से वापसी का मौका मिला और रोसी ने अच्छा परदर्शन कर आलोचकों का मुंह बंद कर दिया।


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