सिलेक्टर्स ने बाहर किया, तो जमकर रोए थे विराट

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Tuesday, October 18, 2016-10:18 AM

नई दिल्ली: टीम इंडिया के टैस्ट कप्तान विराट कोहली के जीवन पर आधारित एक बुक लांच की गई है, जिसका नाम Driven : The Virat kohli है। इस किताब में कोहली के बचपन से लेकर अब तक की चौंकाने वाली खुलासे किए गए हैं। विराट कोहली ने बचपन से ही क्रिकेट पर ध्यान था और उन्होंने कड़ी मेहनत और कठिनाईयों से लड़ कर यह मुकाम हासिल किया है। 

अंडर-15 में सिलेक्टर्स बाहर कर दिया था
एक बार जब अंडर-15 के सिलेक्शन के लिए सिलेक्टर्स आए, उन्होंने विराट को बाकि प्लेयर्स की तरह समझकर बाहर कर दिया था। यही नहीं, उनके साथी प्लेयर्स और कोच का भी सिलेक्टर्स न मजाक उड़ाया था। इसके बाद विराट जमकर रो पड़े थे, क्योंकि उन्होंने ट्रायल्स के लिए जी-जान से मेहनत की थी।

लोकल लेवल धुआंधार इनिंग खेलकर सिलेक्टर्स के उड़ा दिए होश 
विराट ने लोकल लेवल पर धुआंधार इनिंग खेलकर सिलेक्टर्स के होश उड़ा दिए, और आखिरकार उन्हें अंडर-15 में जगह मिली। उनके कोच राजकुमार ने खुलासा किया कि अपनी धुआंधार पारी से अंडर-15 में जगह बनाने वाले विराट को तब ही बीडीएम से कॉन्ट्रेक्ट मिल गया था। कॉन्ट्रेक्ट देने से पहले कंपनी ने विराट के कोच से पूछा, ये इतना यंग है। 'आपको लगता है ये आगे जाएगा'? तब विराट के कोच ने पूरे भरोसे के साथ कहा था, "आप इसे साइन करके देखिए मैं भरोसा दिलाता हूं, ये बहुत आगे जाएगा"।

18 साल के कोहली का ये डेब्यू मैच था
8 दिसंबर 2006 को फिरोजशाह कोटला ग्राउंड पर कर्नाटक और दिल्ली के बीच मैच खेला जा रहा था। विराट बैटिंग करते पहले दिन का खेल खत्म होने तक 40 रन पर नॉटआउट रहे लेकिन उनके पिता प्रेम कोहली की ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई।
टीम की आखिरी उम्मीद विराट को टीम ने घर जाने को कहा, लेकिन विराट ने  टीम का साथ दिया और 90 रन की पारी खेलकर टीम को फॉलोऑन से बचाया।

गुस्साई स्वाभाव के हैं विराट कोहली 
उनके कोच राजरुमार का कहना है कि "मैं हमेशा उसे शांत रखने की कोशिश करता था। वो हमेशा गुस्से से भरा रहता था"। " वो गेम में भी तूफान की तरह सबकुछ एक बार में उड़ा देना चाहता था"। अगर विराट ने फिफ्टी लगा दी, तो फिर उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता था। उसके मन में सेन्चुरी बनाने की जिद चलने लगती थी। 

जिद्दी स्वभाव को देखकर दो-तीन थप्पड़ भी मार देते थे कोच 
विराट को 4 नंबर पर बैटिंग दी जाती थी, पर वे ओपनर्स के साथ ही पैडअप कर लेते थे।अगर वे जल्दी आउट हो जाते थे, तो जबतक मैच खत्म नहीं होता था, पैड नहीं उतारते थे। वे इतने जिद्दी थे कि उन्हें समझाने के लिए कोच राजकुमार को उन्हें दो-तीन थप्पड़ मारने पड़ते थे।
 

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