20,000 भारतीय चाहते हैं मंगल पर बसना

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Thursday, December 12, 2013-12:43 PM

लंदन: मंगल पर बसने की चाहत रखने वाले लोगों में भारतीय दूसरे नंबर पर हैं। यह जानते हुए भी की मंगल पर जाना मतलब वापिस न लौटना, इसके बावजूद भी बहुत सारे भारतीय वहां जाने को तैयार हैं।

2023 में मंगल में भेजे जाने वाले वन वे प्राइवेट मिशन का हिस्सा बनने के लिए 2 लाख से अधिक लोगों ने अप्लाई किया है, जिनमें से 20,000 तो भारतीय ही हैं। इस मिशन पर अप्लाई करने के लिए 5 महीने का समय दिया गया था। 

वन वे प्राइवेट मिशन मंगल का ऐसा मिशन होगा, जिसमें चार महिला-पुरुष को चुनकर हमेशा के लिए मंगल ग्रह पर रहने के लिए भेजा जाएगा।यानि वापिस आने की कोई गुंजाइश नहीं।

इस मिशन के फाउंडेशन का कहना है कि 2018 में एक मानवरहित मिशन भी मंगल पर भेजा जाना है जिसके लिए लीड सप्लायर जुटा लिए गए हैं। इस मिशन में एक रोबॉटिक लैंडर और एक कम्युनिकेशन सैटलाइट भेजा जाना है।

इस डच कंपनी के अनुसार, मार्स वन एस्ट्रोनॉट सिलेक्शन प्रोग्राम का पहला ऐप्लिकेशंस राउंड बंद कर दिया गया है। इसके लिए 140 देशों से लोगों ने आवेदन किए हैं। सबसे ज्यादा 24 पर्सेंट आवेदन अमेरिका से आए हैं। दूसरे नंबर पर भारत (10पर्सेंट ) और तीसरे नंबर पर चीन (6 पर्सेंट) रहा।

अब सभी आवेदनों में से मार्स वन सिलेक्शन कमेटी 2 साल तक चलने वाले तीन और राउंड में मार्स वासियों का चुनाव करेगी। अभी मौजूदा आवेदकों की स्क्रीनिंग में कई महीने लग सकते हैं। पहले राउंड में सिलेक्ट हुए कैंडिडेट्स को अगले साल बता दिया जाएगा। 2014 में सिलेक्शन का दूसरा राउंड शुरू होगा। इस राउंड में सिलेक्शन कमेटी खुद एक-एक व्यक्ति का अकेले में इंटरव्यू करेगी।

2015 तक चार-चार लोगों वाली छह से दस टीमें ट्रेनिंग के लिए चुनी जाएंगी और 7 साल तक इन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। 2023 में इन टीमों को मंगल पर भेजा जाएगा, जो सारी उम्र वहीं रहेंगे।

 


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