अंटार्कटिका की बर्फ में दबे हैं हीरे

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Wednesday, December 18, 2013-2:54 PM

लंदन: दुनियाभर के वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं के जिज्ञासा का केंद्र बने रहने वाले अंटार्कटिका में हाल ही में मिले हीरे के प्रमाणों ने इस निर्जन महाद्वीप में अन्य लोगों की उत्सुकता को भी बढ़ा दिया है।

दुनिया के लगभग सबसे ठंडे और सूखे इस वीरान महाद्वीप में अनुसंधान के काम में लगे वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्हें अंटार्कटिका में स्थायी रूप से बर्फ की मोटी परतों के नीचे दबी रहने वाली ऐसी चट्टानों की पहचान की गई है, जो हीरे की बहुलता वाली चट्टानों की रूप में जानी जाती हैं।

ऑनलाइन जरनल 'नेचर कम्युनिकेशंस' में प्रकाशित रिपोर्ट में अंटार्कटिका में काम करने वाले वैज्ञानिकों ने यहां हीरे पाए जाने के अकाट्य प्रमाण मिलने का दावा किया है, हालांकि अंटार्कटिका में मिलने वाले खनिजों का व्यापारिक उद्देश्यों से खनन प्रतिबंधित है।

दुनियाभर में किंबरलाइट चट्टाने हीरे की चट्टान के नाम से मशहूर हैं। नीले रंग की इन चट्टानों में अफ्रीका, साइबेरिया और आस्ट्रेलिया में बड़ी मात्रा में हीरे पाए गए हैं। अनुसंधानकर्ताओं को अब अंटार्कटिका में भी यह चट्टाने मिली हैं। इसी कारण इस निर्जन महाद्वीप पर भी कीमती हीरे पाए जाने के प्रमाण मिले हैं।

जमीन से लगभग 150 किलोमीटर नीचे शुद्ध कार्बन अत्यधिक उच्च तापमान और दबाव पर हीरे में बदल जाता। सामान्यत: जमीन की गहराइयों से हीरे ज्वालामुखी उदभेदन जैसी क्रियाओं के माध्यम से किंबरलाइट चटट्टानों तक पहुंचते है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अंटार्कटिका में बर्फ की स्थायी चादर के नीचे अत्यधिक गहराई में हुए ज्वालामुखी उद्भेदन के कारण बेशकीमती हीरे सतह के निकट आ गए। ब्रिटेन के अंटार्कटिका अभियान दल में शामिल भूगर्भशास्त्री डा. टील रीले ने बताया कि इस क्षेत्र में किंबरलाइट चट्टानों का पाया जाना अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है।
 


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