Sixth Sense नाम की कोई चीज नहीं होती: स्टडी

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Thursday, January 16, 2014-4:59 PM

मेलबर्न: एक नई स्टडी में इस बात का दावा किया गया है कि 'छठी बत्ती' यानी सिक्स्थ सेंस नाम की कोई चीज नहीं होती। सिक्स्थ सेंस यानि जब भी किसी तरह का बदलाव होता है लोग उसे भांप सकते हैं, वह भी तब जब वह यह भी नहीं देख पाते की क्या बदलाव हुआ है।

मेलबर्न स्कूल ऑफ साइकोलॉजिकल साइंसेज और रिसर्चर से जुड़े स्टडी में शामिल पियर्स हॉवे ने बताया कि यह पहली ऐसी स्टडी है जो बताती है कि लोग उन बदलावों को भी आसानी से भांप लेते हैं जिन्हें वह अपनी आंखों से पहचान नहीं पाते।

इस स्टडी को देखते हुए एक उदाहरण भी दिया गया। जिसके अनुसार, कोई शख्स यह तो अनुमान लगा लेता है कि किसी के लुक्स में बदलाव आया है।लेकिन वहयह नहीं जान पाता कि उस व्यक्ति ने बाल को कटवाया है।

हॉवे के अनुसार, यह एक आम मान्यता है कि कोई भी शख्स किसी बदलाव का अनुभव अपने दिमाग की मदद से कर लेता है और इसके लिए उसे देखने, सुनने, चखने, सूंघने या फिर छूने की आवश्यकता नहीं होती और इन्ही को सिक्स्थ सेंस माना जाता रहा है।


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