अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में चीन, अमेरिका से काफी पीछे है भारत: रिपोर्ट

  • अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में चीन, अमेरिका से काफी पीछे है भारत: रिपोर्ट
You Are HereInternational
Friday, February 07, 2014-10:59 AM

वॉशिंगटन: अमेरिका की एक आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत वैज्ञानिक अनुसंधान और वैश्विक विकास के क्षेत्र में अमेरिका और चीन से काफी पीछे है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका इस मामले में भारत से काफी आगे है तो चीन में अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में खर्च में सबसे तेजी से इजाफा हो रहा है। वैश्विक तौर पर अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में वर्ष 2011 में कुल प्रदर्शन (खर्च के रूप में मापित) 1,435 अरब डॉलर अनुमानित किया गया है, जो उपलब्ध ताजा कुल वैश्विक अनुमानित राशि है।

नेशनल साइंस बोर्ड (राष्ट्रीय विज्ञान बोर्ड) द्वारा कल जारी किए गए रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2001 में यह अनुमानित राशि 753 अरब डॉलर थी, जिसमें एक दशक में प्रतिवर्ष औसतन 6.7 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में वर्ष 2010 में अमेरिकी खर्च 407 अरब डॉलर था, तो वर्ष 2011 में यह 424 अरब डॉलर था। जो वर्ष 2011 के कुल अनुमानित वैश्विक खर्च का 30 प्रतिशत हिस्सा था और इस तरह से अमेरिका ने शोध और विकास के क्षेत्र में विश्व के सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देश के रूप में अपना स्थान कायम रखा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अन्य देशों ने भी अनुसंधान और विकास में अपने खर्च को बढ़ाया है। अमेरिका का योगदान वर्ष 2001 से कम हुआ है, जो उस वक्त 37 प्रतिशत था। हालांकि इस दौरान चीन ने अनुसंधान और विकास में लगातार वृद्धि जारी रखी है। वर्ष 2011 में 208 अरब डॉलर खर्च के साथ चीन अनुसंधान और विकास पर खर्च करने वाला विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश बना रहा। अमेरिकी वृद्धि की तुलना में यह आधे से थोड़ा कम था। शोध और विकास पर चीन का खर्च असाधारण रूप से 2001-11 के दौरान औसतन प्रतिवर्ष 20.7 प्रतिशत बढ़ा है।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में भारत का खर्च वर्ष 2007 में 24 अरब डॉलर था। इस दौरान शोध और विकास पर अमेरिका की वार्षिक वृद्धि दर औसतन 4.3 प्रतिशत थी।  इसी तरह से अनुसंधान और विकास में वृद्धि करने वाले से सबसे बड़े देशों में यूरोपीय संघ देश (जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन) का खर्च तीन से छह प्रतिशत के बीच है। वर्ष 2001 में चीन, भारत, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और ताइवान सहित पूर्व-दक्षिण पूर्व और दक्षिण एशिया के देशों में अनुसंधान और विकास खर्च में वृद्धि विश्व के खर्च की कुल 25 प्रतिशत प्रतिदर्शित करती थी, लेकिन वर्ष 2011 में यह 34 प्रतिशत हो गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन (15 प्रतिशत) और जापान (10 प्रतिशत) इस समूह में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देश हैं। अमेरिका और चीन के बाद जापान 147 अरब डॉलर खर्च के साथ अनुसंधान और विकास पर खर्च करने वाला विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। रूसी गणराज्य, ताइवान, ब्राजीन, इटली, कनाडा, भारत, ऑस्ट्रेलिया और स्पेन का आगामी वर्षों में योगदान 20 अरब डॉलर से 35 अरब डॉलर के बीच रहने का अनुमान है। विश्व के आर्थिक देशों के दूसरे सबसे समूह सहित शीर्ष सात देशों का अनुसंधान और विकास पर वर्तमान वैश्विक खर्च 84 प्रतिशत अनुमानित किया गया है।
 


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You