लंबी यात्रा पर जाने से पहले अवश्य करें ये उपाय

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Wednesday, September 21, 2016-12:09 PM

किसी भी तरह की यात्रा के प्रारंभ में ही हमें जान लेना चाहिए कि कौन-सी दिशा शुभ है और कौन-सी अशुभ।

 

पूर्व दिशा : इस दिशा में सोमवार और शनिवार को दिशा शूल दोष होता है। इन दिनों में पूर्व दिशा में यात्रा करना अशुभ होता है।

पश्चिम दिशा : इस दिशा में रविवार तथा शुक्रवार को दिशा शूल दोष होता है। यह अशुभ होता है।

दक्षिण दिशा :  इस दिशा में वीरवार को यात्रा करना ठीक नहीं होता।

उत्तर दिशा : मंगल और बुधवार के दिन उत्तर दिशा में यात्रा करना अमंगलकारी होता है।

ऐसे में यात्रा करना जरूरी हो तो उसका भी ज्योतिष में निदान दिया गया है। ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार प्रतिदिन दिशा शूल का प्रभाव दिन में 12 बजे तक ही रहता है। 12 बजे के बाद दिशा शूल दोष का प्रभाव कम हो जाता है। जैसे उत्तर दिशा में मंगल और बुधवार को दिशा शूल दोष है और यात्रा करना भी जरूरी है तो यात्रा प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में प्रारंभ कर देनी चाहिए तथा प्रारंभ करने से पूर्व कुछ खा अवश्य लेना चाहिए।


यात्रा विधि : यात्रा प्रारंभ करने से पहले दाहिने पैर को सर्व प्रथम उठाकर यात्रा दिशा में 32 कदम चल कर यात्रा करने के साधन (वाहन) में बैठकर तिल, घी, तांबे का पात्र दान करना चाहिए। 

 

यात्रा के दौरान ठहरने का नियम
शाास्त्रानुसार यात्रा के समय 3 से 5 दिन तक ही कहीं भी रुकना चाहिए।

 

यात्रा के समय त्याज्य वस्तु
दुग्धं त्याज्यं पूर्वमेव त्रिरात्रं क्षौरं त्याज्यं पंचरात्रंच
क्षौदतैलम् वासरेकिस्मन् वमिश्चत्याज्यम् पूर्वम्
त्यानप्र मिपालेन नूनम।

यात्रा प्रारंभ करने से तीन दिन पहले दूध व यात्रा के दिन में शहद, तेल छोड़ देने चाहिएं।


यात्रा पूर्व शुभ शकुन
यात्रा प्रारंभ करते ही हमें ब्राह्मण, घोड़ा, हाथी, फल, अन्न, दूध, दही, गौ, सरसों, कमल, श्वेत व, मयूर, जलपूर्ण कलश, मिट्टी, कन्या, रत्न, पगड़ी, सफेद बैल, संतान सहित स्त्री, मछली, पालकी, वेदध्वनि आदि सामने नजर आएं तो ये सब शुभ संकेत देने वाले होते हैं। 

 

यात्रा पूर्व अशुभ शकुन
यात्रा प्रारंभ करते ही हड्डी, सांप, नमक, आग, जली हुई लकड़ी, सादी सूखी लकड़ी, शत्रु, रोगी मनुष्य, खुले केश वाला मनुष्य, अंगहीन मनुष्य, छींक, काला कपड़ा आदि सामने हो तो यात्रा रोक देनी चाहिए और पांच या 10 मिनट रुक कर यात्रा पुन: प्रारंभ  करनी चाहिए। लंबी यात्राओं के दौरान प्रतिदिन सायंकाल हनुमान जी के मंत्रों का स्मरण, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। 


इससे आपकी यात्रा अधिक सुखद और आसान हो जाती है। चारधाम या तीन धाम आदि यात्राएं लंबी होती हैं। इन यात्राओं से पूर्व हमारे घर के निकट हनुमान मंदिर हो या भैरव मंदिर हो तो दोनों में से किसी एक मंदिर पर चोला जरूर चढ़ाना चाहिए।
 

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