पूर्व दिशा में की गई Mistakes, घर के सदस्यों को बनाती हैं झगड़ालू और क्रोधी

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You Are HereVastu Shastra
Thursday, October 06, 2016-11:39 AM

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की पूर्व दिशा में वायु तत्व का अधिपत्य माना जाता है।  वायु तत्व से प्राप्त ऊर्जा पारिवारिक सदस्यों की जिन्दगी में ताजगी, उमंग और खुशियां लेकर आती है। यदि इस दिशा में घर के लोग किसी भी तरह की कोई गलती करें तो इसका प्रभाव उनके आचरण पर पड़ता है। पूर्व दिशा में की गई गलतियां, घर के सदस्यों को बनाती हैं झगड़ालू और क्रोधी

 

घर की पूर्व दिशा में न करें ये काम
* कोई भी वजनदार सामान न रखें।


* कबाड़ इकट्ठा न करें।


* जो सामान प्रयोग नहीं किया जाता, उसे भी इस दिशा में न रखें। 


घर की पूर्व दिशा में करें ये काम

* यह दिशा प्राकृतिक तौर पर हवादार होनी चाहिए। 


* सुबह घर की साफ-सफाई इसी दिशा से करनी आरंभ करें। 

 

* इस दिशा में एक खिड़की अथवा दरवाजा अवश्य रखें।


* हिन्दू धर्म के पंचदेवों में से प्रमुख देवता सूर्यदेव ही है । सूर्य देव को वेदों में जगत की आत्मा कहा गया है । यह सत्य है कि सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है । सूर्य देव को सर्व प्रेरक, सर्व प्रकाशक,सर्व प्रवर्तक ,सर्व कल्याणकारी माना गया है। यजुर्वेद ने "चक्षो सूर्यो जायत" कह कर सूर्य को भगवान का नेत्र माना है। 

सूर्य नारायण अपना प्रकाश धरती पर पूर्व दिशा से फैलाना आरंभ करते हैं। अत: सुबह उठकर हर रोज सूर्य उपासना करके मनुष्य हर सांसारिक सुख को पूरा कर सकता है। रविवार को भगवान सूर्यदेव का दिन माना जाता है और सूर्य देव जी की उपासना के लिए यह दिन बड़ा शुभ माना गया है। सूर्य देव जी को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए। सूर्य देव जी ज्ञान, सुख, स्वास्थ्य, पद, सफलता, प्रसिद्धि के साथ-साथ सभी आकांक्षाओं को पूरा करते है।

सूर्य अर्घ्य मन्त्रः 
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते ।
अनुकम्पय मां देवी गृहाणार्घ्यं दिवाकर ।।


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