इन कारणों से घर में आती हैं नकारात्मक शक्तियां, होते हैं कई नुकसान

  • इन कारणों से घर में आती हैं नकारात्मक शक्तियां, होते हैं कई नुकसान
You Are HereVastu Shastra
Wednesday, September 21, 2016-10:18 AM

शास्त्रों, वास्तु और फेंगशुई के अनुसार हर दिशा का अपना महत्व है। उसी के अनुरूप उस जगह पर नकारात्मक अथवा सकारात्मक शक्तियों का वास होता है। वास्तु में सूर्य को ब्राह्म में ऊर्जा का स्त्रोत माना जाता है। इसी कारण पूर्व दिशा ऊर्जा का केंद्र रहती है पश्चिम में सूर्य अस्त होता है जहां उसकी उर्जा का हास होता है और इसी दिशा पर शनिदेव वास करते हैं। शास्त्रों में दैवीय ऊर्जा का उद्गमन उत्तर पूर्व दिशा कही गई है। इसे ईशान कोण भी कहा जाता है। इसी दिशा से सारी दैवीय शक्तियां संचालित होती हैं। यही स्थान ईश्वर को भी समर्पित है इस के विपरीत दक्षिणी पश्चिम दिशा अर्थात साउथ वैस्ट दिशा पर दैत्यों और पिशाचों का काल वास होता है।


 जब किसी घर में पूर्व से सूर्य की किरणों को प्रवेश करने में बाधा उत्पन्न हो, उत्तर पश्चिम दिशा से वायु का संचालन बंद हो जाए, उत्तर पूर्व दिशा से जल का स्थान दूषित हो जाए, देव स्थान या घर का मंदिर दूषित हो जाए तो उन जगहों पर नकारात्मक शक्तियों का वास हो जाता है तथा भूत-प्रेत अपना बसेरा बना लेते हैं। जिस स्थान पर 43 दिन तक सूर्य की किरणों का संचालन न हो तथा वहां की दिवारों पर नमी के कारण सीलन हो तथा हवा के न संचालित होने से दुर्गुन्ध आती हो ऐसे स्थान पर भूत-प्रेत निवास करते हैं। 


जिस जमीन पर पूर्वजों का मरघट स्थान हो तथा उस जगह पर कोई व्यक्ति अपना आशियाना बना ले तो वहां नकारात्मक शक्तियां अपना वास बना लेती हैं। पीपल अथवा बरगद को काट कर घर बनाया गया हो। वहां भी पिशाच वास करते हैं। जो घर किसी कॉलोनी अथवा सड़क का आखरी घर हो और जिसके आगे जाकर रास्ता समाप्त हो जाता हो वहां पर भी नकारात्मक शक्तियों का वास होता है।

इसके अतिरिक्त

* जिस स्थान पर स्वच्छता नहीं होती वहां नकारात्मकता अपना प्रभाव दिखाती है। ऐसे स्थान पर कोई बस नहीं सकता।

* जिस घर-परिवार में लोग बीमार रहते हैं या स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं से जूझते रहते हैं वहां भी नेगेटिव एनर्जी अपना साम्राज्य स्थापित कर लेती है। 

* घर में पूरी तरह से रोशनी और पानी के न होने से घर-व्यापार पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 

* रात को नींद के आगोश में जाने से पहले अधिकतर लोगों को इत्र, डियो अथवा सुंगध को किसी न किसी रूप में अपने शरीर पर लगाना भाता है। पुराणों के अनुसार ऐसा करना नकारात्मक शक्तियों को बुलावा देना है। रात के समय नकरात्मकता सुंगधित काया की ओर विशेष रूप से आकर्षित होती हैं।
 


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