मां लक्ष्मी की पसंदीदा वस्तु 30 अक्टूबर से पहले ले आएं घर, मिलेगा धन का वरदान

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You Are HereVastu Shastra
Monday, October 17, 2016-12:48 PM

शास्त्रों के अनुसार जब देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो सबसे पहले उसमें से विष निकला तत्पश्चात लक्ष्मी, कौस्तुभ, पारिजात, सुरा, धन्वन्तरि, चंद्रमा, पुष्पक, ऐरावत, पांचजन्य, शंख, रम्भा, कामधेनु, उच्चैः श्रवा और अंत में अमृत कुंभ निकला जिसे लेकर धन्वन्तरि जी आए। देवी लक्ष्मी की तरह शंख भी सागर से ही उत्पन्न हुआ इसलिए धार्मिक ग्रंथों में शंख को लक्ष्मी जी का भाई बताया गया है।


सनातन धर्म में शंख को बहुत पवित्र माना गया है। यदि लक्ष्मी जी की विशेष कृपा के आप अभिलाषी हैं तो दक्षिणावर्ती शंख का जोड़ा अर्थात नर और मादा दो शंखों को देव प्रतिमा के सम्मुख स्थापित कर लें। शंख की विभिन्न प्रजातियों के अनुरूप शास्त्रों में विभिन्न प्रयोजनों की व्याख्या मिलती है। तंत्र के अनुसार दक्षिण की ओर खुलने वाला शंख साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा कहा जाता है।

 

 मां लक्ष्मी की पसंदीदा वस्तु 30 अक्टूबर से पहले ले आएं घर, मिलेगा धन का वरदान


* शंख को घर में प्रतिष्ठित करने से वास्तुदोष समाप्त होते हैं। 



* दक्षिणावर्ती शंख के पूजन से घर में खुशहाली आती है और लक्ष्मी प्राप्ति के साथ-साथ सम्पत्ति भी बढ़ती है। 



* जिस घर में शंखनाद और शंख पूजन होता है वहां लक्ष्मी स्थाई रूप से निवास करती हैं। 



* इस मंगलचिह्न को घर के पूजा स्थल में रखने से जहां अरिष्टों और अनिष्टों का नाश होता है, सौभाग्य वृद्धि भी होती है।



* शंख से निकलने वाली ध्वनि जहां तक जाती है वहां तक बीमारियों के कीटाणुओं का नाश हो जाता है।



* खांसी, दमा, पीलिया, ब्लड प्रैशर या दिल से संबंधित मामूली से लेकर गंभीर बीमारी से छुटकारा पाने के लिए प्रतिदिन शंख बजाएं।



* शंख में रखे पानी का सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं।  



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