नवरात्र: घट स्थापना के समय रखें इन बातों का ध्यान

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You Are HereVastu Shastra
Saturday, October 01, 2016-9:59 AM

आज से आश्विन मास के नवरात्र आरंभ हो रहे हैं जो 10 अक्तूबर तक चलेंगे। प्रतिपदा 1 तथा 2 अक्तूबर को रहेगी इस कारण इस बार नवरात्र बढ़ कर 10 हो गए हैं।आादिशक्ति के 9 स्वरूपों की आराधना का यह पर्व प्रथम तिथि को कलश स्थापना से आरंभ होता है। नवरात्र के नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों (शैल पुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूषमांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री) की पूजा की जाती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। शास्त्रों में दुर्गा के नौ रूप बताए गए हैं। नवरात्र में घट स्थापना अौर अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है। घट की स्थापना करते समय वास्तु नियमों का पालन किया जाए तो बहुत शुभ होता है। ऐसा करने से माता प्रसन्न होती है। जानिए इन वास्तु नियमों के बारे में-

 

* ईशान कोण अर्थात उत्तर पूर्व को देवताअों की दिशा माना जाता है। इस दिशा में माता की प्रतिमा अौर घट की स्थापना करना शुभ होता है। 

 

* जो माता के सामने अखंड ज्योति प्रज्वलित करते हैं उन्हें इसे आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में रखना चाहिए। पूजन के समय मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में रखें।

 

* चंदन की लकड़ी पर घट स्थापना करना शुभ होता है। पूजा स्थल के पास सफाई होनी चाहिए। वहां कोई गंदा कपड़ा या वस्तु न रखे।

 

* जो लोग नवरात्रों में ध्वता को बदलते हैं। वे ध्वजा को छत पर उत्तर पश्चिम दिशा में लगाएं।

 

* पूजा स्थल के सामने थोड़ा स्थान खुला होना चाहिए। जहां बैठकर पूजा अौर ध्यान लगाया जा सके।  

 

* घट स्थापना स्थल के आस-पास शौचालय या स्नानगृह नहीं होना चाहिए।
 


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