घर में अवश्य लगाएं पूर्वजों के चित्र, जरा संभल कर

  • घर में अवश्य लगाएं पूर्वजों के चित्र, जरा संभल कर
You Are HereVastu Shastra
Friday, September 16, 2016-12:06 PM
आप अपने सुपुत्र से कभी पूछें कि उसके दादा-दादी जी या नाना-नानी जी का क्या नाम है। आज के युग में 90 प्रतिशत बच्चे या तो सिर खुजलाने लग जाएंगे या ऐं...ऐं... करने लग जाएंगे। पड़दादा का नाम तो रहने ही दें।
 
संभव है कि वह आपके पिता जी का नाम कुछ का कुछ बता दे और आप मेहमानों के आगे खिसिया-कर के बगलें झांकते रह जाएं। यदि आप चाहते हैं कि आपका नाम आपका पोता भी जाने तो श्राद्ध का महत्व समझें। 
 
श्राद्ध, आने वाली संतति को अपने पूर्वजों से परिचित करवाते हैं। जिन दिवंगत आत्माओं के कारण पारिवारिक वृक्ष खड़ा है, उनकी कुर्बानियों व योगदान को स्मरण करने के ये 15 दिन होते है। इस अवधि में अपने बच्चों को परिवार के दिवंगत पूर्वजों के आदर्श व कार्यकलापों के बारे में बताएं ताकि वे कुटुम्ब की स्वस्थ परंपराओं का निर्वाह करें।
 
दिवंगत परिजनों के विषय में वास्तुशास्त्र का अवश्य ध्यान रखना चाहिए।
 
घर में पूर्वजों के चित्र सदा नैर्ऋत्य दिशा में लगाएं। ऐसे चित्र देवताओं के चित्रों के साथ न सजाएं। पूर्वज आदरणीय एवं श्रद्धा के प्रतीक हैं, पर वे ईष्ट देव का स्थान नहीं ले सकते। जीवित होते हुए अपनी न तो प्रतिमा बनवाएं और न ही अपने चित्रों की पूजा करवाएं। इसे किसी भी प्रकार शास्त्र सम्मत नहीं माना जा सकता।
 
* शयन कक्ष में पूजा घर और पूर्वजों के चित्र लगाना अपशगुन होता है। 
 
* पूर्वजों की तस्वीरें मंदिर में न लगाएं।
 

* रसोई में भी मृत पितरों की फोटों न लगाएं।  किचन में भोजन पकाते समय गृहलक्ष्मी का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए । बर्तन, मसाले, राशन आदि पश्चिम दिशा में रखें। दीवारों को हरा, पीला, क्रीम या गुलाबी रंग से रंगवाना शुभ होता है । 


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