विजयदशमी पर परिवार सहित घर की पूर्व दिशा की ओर जाकर करें ये उपाय, होंगे कई लाभ

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You Are HereVastu Shastra
Monday, October 10, 2016-9:15 AM

विजयदशमी का पर्व राष्ट्रीय महत्व का पर्व है। भारत के कई प्रदेशों में यह कृषि से संबंधित पर्व भी है। हमारे धर्म ग्रंथों में इस पर्व में आयुध पूजा तथा शमी वृक्ष की पूजा का भी विधान है। हमारी संस्कृति में शमी को पवित्रतम वृक्ष माना गया है, कदाचित यही कारण रहा था कि रामायण में हनुमानजी ने माता-सीता को शमी वृक्ष के समान पवित्र कहा था। शमी वृक्ष का पूजन करने से पतिव्रता स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और जो लोग शत्रुओं से पीड़ित हों, उन्हें विजय मिलती है।


‘श्रीरामचरितमानस’ के लंकाकांड में वर्णित राम-रावण युद्ध प्रसंग का पाठ करने से शत्रु पर विजय प्राप्त होती है।


विजयदशमी का पावन पर्व न केवल हमारी आध्यात्मिक ऊर्जा को ही बढ़ाता है बल्कि यह दिन शास्त्रों में किसी भी मांगलिक कार्य के लिए वर्ष भर के प्रशस्त दिनों में से भी एक है। सभी तरह के शुभ कार्य व अनुष्ठान आदि विजयदशमी के दिन अनंत फल देने वाले हो जाते हैं।

 
दशहरा शक्तिपूजन का दिन है। इसीलिए प्राचीन शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप आज तक क्षत्रिय-क्षत्रपों के यहां शक्ति के पूजन के रूप में अस्त्र-शस्त्रों का अर्चन-पूजन होता है। सभी कार्यों में सिद्धि प्रदान करने वाला दशहरा पर्व है, जो सभी मनोवांछित फल प्रदान करता है।

 
इस दिन अनेक धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा शास्त्रों में है। परिवार के साथ घर से पूर्व दिशा की ओर जाकर शमी वृक्ष अर्थात खेजड़ी का पूजन करना चाहिए। खेजड़ी वृक्ष की पूजा करने के बाद उसकी टहनी घर में लाकर मुख्य चौक के अंदर प्रतिष्ठित करनी चाहिए। शमी शत्रुओं का समूल विनाश करती है। शमी के कांटे हत्या इत्यादि से पापों से भी रक्षा करते हैं।


वास्तु के अनुसार, प्रतिदिन शमी वृक्ष का पूजन करने से और सरसों के तेल का दीप अर्पित करने से शनि के दुष्प्रभाव से निजात मिलता है।


 ‘अर्जुन के धनुष को धारण करने वाली और भगवान श्री राम को भी प्रिय लगने वाली शमी मेरा कल्याण करे।’
 

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