कश्मीर में  ‘आतंकवाद के गढ़’ पुलवामा और शोपियां में तीन दशक बाद सिनेमा की वापसी

Edited By ,Updated: 20 Sep, 2022 04:42 AM

cinema returns after three decades in pulwama and shopian

‘धरती का स्वर्ग’ कहलाने वाला कश्मीर शुरू से ही देश की फिल्म इंडस्ट्री के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। विशेष रूप से कश्मीर घाटी में 1989 में आतंकवाद शुरू होने से पहले तक बड़ी संख्या में फिल्मों

‘धरती का स्वर्ग’ कहलाने वाला कश्मीर शुरू से ही देश की फिल्म इंडस्ट्री के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। विशेष रूप से कश्मीर घाटी में 1989 में आतंकवाद शुरू होने से पहले तक बड़ी संख्या में फिल्मों की शूटिंग होती रही परंतु बाद में यह सिलसिला काफी कम हो गया। उल्लेखनीय है कि 1980 के दशक के अंत में घाटी में आतंकवाद बढऩे के साथ ही वहां के सिनेमाघर भी एक-एक करके बंद हो गए। तब घाटी में 19 सिनेमाघर थे। इनमें से अकेले राजधानी श्रीनगर में ही ‘फिरदौस’, ‘शाह’, ‘नाज’, ‘नीलम’,  ‘रीगल’, ‘पैलेडियम’, ‘खय्याम’, ‘शिराज’ तथा ‘ब्रॉडवे’ 9 सिनेमाघर थे। 

1999 में जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में कुछ कमी आती दिखाई दे रही थी, नैशनल कांफ्रैंस की फारूक अब्दुल्ला सरकार ने ‘रीगल’, ‘नीलम’ व ‘ब्रॉडवे’ सिनेमाघरों को खोलने की कोशिश की। श्रीनगर के हाई सिक्योरिटी वाले क्षेत्र लाल चौक में स्थित ‘रीगल’ सिनेमाघर को लगभग 11 वर्ष के अंतराल के बाद इसके मालिकों ने दोबारा खोला था परंतु 24 सितम्बर, 1999 को इस पर आतंकवादियों द्वारा 3 ग्रेनेड फैंकने की घटना के चलते 1 व्यक्ति की मौत और 12 लोगों के घायल होने के बाद इसे भी ताला लग गया। 

पिछले कुछ समय से यहां फिर स्थिरता आनी शुरू होने के साथ ही बॉलीवुड ने एक बार फिर कश्मीर की तरफ रुख करना शुरू किया है। इसी शृंखला में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 18 सितम्बर को दक्षिण कश्मीर में आतंकवाद के गढ़ पुलवामा और शोपियां के जुड़वां जिलों में 2 बहुउद्देश्यीय (मल्टीपर्पस) सिनेमाघरों का उद्घाटन किया है और ये सिनेमाघर पुलवामा के ‘द्रासू’ तथा शोपियां के म्यूनिसिपल कौंसिल में खोले गए हैं। 

यह न सिर्फ कश्मीर के लिए ऐतिहासिक दिन था बल्कि केंद्र सरकार द्वारा 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 व 35-ए हटाने के बाद यहां हो रहे सकारात्मक बदलावों की कड़ी में एक और बेहतरीन बदलाव है। जम्मू-कश्मीर के ‘मिशन यूथ’ विभाग द्वारा संबंधित जिला प्रशासनों के सहयोग से खोले गए इन बहुउद्देश्यीय सिनेमाघरों में फिल्मों के प्रदर्शन के अलावा युवाओं को कौशल की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। 

उप-राज्यपाल ने ये बहुउद्देश्यीय सिनेमाघर पुलवामा और शोपियां के युवाओं को समर्पित करते हुए यहां हिन्दी फिल्म ‘भाग मिलखा भाग’ देखी। उनके साथ कश्मीर के डिवीजनल कमिश्नर ‘पांडूरंग के.पोले’ तथा ए.डी.जी.पी. विजय कुमार के अलावा चंद अन्य सिने प्रेमी भी थे। इस अवसर पर श्री सिन्हा ने कहा कि पिछला एक दशक दक्षिण कश्मीर में बहुत हिंसक रहा जब सैंकड़ों युवकों ने जम्मू-कश्मीर में नई दिल्ली के शासन के विरुद्ध हथियार उठाए परंतु अब स्थिति तुलनात्मक दृष्टि से शांत है और लोग अपने काम धंधों पर वापस लौट रहे हैं तथा सिनेमाघरों के खुलने से क्षेत्र के युवाओं का मनोरंजन भी होगा और उन्हें रोजगार भी मिलेगा। 

जम्मू-कश्मीर फिल्म विकास परिषद के सी.ई.ओ. व उपराज्यपाल के प्रमुख सचिव नीतीश्वर कुमार के अनुसार अब सरकार लगभग सभी जिलों में कम से कम एक सिनेमाघर खोलने की योजना पर विचार कर रही है जिसके अंतर्गत अनंतनाग, श्रीनगर, बांदीपोरा, गांदेरबल, डोडा, राजौरी, पुंछ, किश्तवाड़ और रियासी में जल्दी ही सिनेमाघरों का उद्घाटन किया जाएगा। कश्मीर घाटी का पहला मल्टीप्लैक्स ‘इनोक्स’ श्रीनगर में बनकर तैयार है जिसका उद्घाटन उपराज्यपाल मनोज सिन्हा 20 सितम्बर को करेंगे। 

इस मल्टीप्लैक्स में आगे-पीछे होने वाली आरामदेह 520 सीटों की क्षमता वाले 3 सिनेमाघर होंगे और नवीनतम साऊंड सिस्टम भी लगाया गया है। इसकी टिकटें ऑनलाइन या ऑफलाइन कहीं से भी खरीदी जा सकती हैं। परियोजना से जुड़े ‘इनोक्स’ के विजय धर के अनुसार यह थिएटर कश्मीरी संस्कृति को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है जिसमें फूड कोटर्््स के जरिए स्थानीय व्यंजनों को भी प्रमोट किया जाएगा। 

लगभग 3 दशक के मनोरंजन के ‘ब्लैक आऊट’ के बाद एक बार फिर ‘मनोरंजन युग’ की वापसी हुई है। उम्मीद करनी चाहिए कि प्रशासन की चौकसी और जनता के सहयोग से यहां सिनेमाघर और अन्य मनोरंजन स्थल पूरे जोर-शोर से चलने लगेंगे और फिल्मों की शूटिंग भी पूरी तेजी पकड़ लेगी जिससे घाटी की खोई हुई शान दोबारा लौटेगी।—विजय कुमार 

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