नव वर्ष के पहले दिन ही 3 दुखद दुर्घटनाओं में अनेक लोगों की मौत

Edited By ,Updated: 02 Jan, 2022 05:17 AM

many people died in 3 tragic accidents on the first day of the new year

प्रत्येक बीतने वाले वर्ष को अलविदा कहते हुए सब लोग यही कामना करते हैं कि आने वाला नया वर्ष पिछले वर्ष से बेहतर हो, परंतु होता वही है जो विधाता ने भाग्य में लिखा होता है। नव वर्ष 2022 के स्वागत का उत्साह अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि 3  दुखद घटनाओं ने देश...

प्रत्येक बीतने वाले वर्ष को अलविदा कहते हुए सब लोग यही कामना करते हैं कि आने वाला नया वर्ष पिछले वर्ष से बेहतर हो, परंतु होता वही है जो विधाता ने भाग्य में लिखा होता है। नव वर्ष 2022 के स्वागत का उत्साह अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि 3  दुखद घटनाओं ने देश को झकझोर दिया है। पहली घटना जम्मू-कश्मीर में कटरा स्थित वैष्णो माता के मंदिर में नव वर्ष के प्रथम दिन तड़के 2 से 3 बजे के बीच हुई जब माता का आशीर्वाद लेने पहुंचे श्रद्धालुओं में अचानक भगदड़ मच जाने के परिणामस्वरूप 12 की मौत हो गई तथा 15 अन्य घायल हो गए जिनमें से 3 की हालत गम्भीर बताई जाती है। 

घटना के वास्तविक कारणों का पता तो जांच के बाद ही चलेगा जिसके लिए कमेटी गठित कर दी गई है परंतु इस बारे कई तरह की बातें सुनने में आ रही हैं। कुछ लोगों के अनुसार माता के दर्शनों के लिए लगी लम्बी कतार में दो गुटों के बीच बहस के बाद धक्कामुक्की शुरू हो गई। एक अन्य चश्मदीद ने दावा किया है कि सी.आर.पी.एफ. ने कथित रूप से लोगों को यह कहते हुए धमकाना शुरू कर दिया कि किसी वी.आई.पी. को आना है और उसे दर्शन करवाने हैं इसलिए रास्ता जल्दी खाली करो। लोग तेजी से आगे-पीछे होने लगे जिससे भगदड़ मच गई। एक अन्य जानकारी के अनुसार गेट नम्बर 3 पर जब श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए कतारों में खड़े थे तभी किसी ने ऊपर से पत्थर खिसकने की अफवाह उड़ा दी जिससे मची भगदड़ इस दुर्घटना का कारण बनी। 

भीड़ इतनी अधिक थी कि बच्चों तथा महिलाओं सहित कई लोग जमीन पर गिर कर दूसरे लोगों के नीचे दब गए जिससे उनका दम घुटने लगा। कई लोग जान बचाने के लिए खम्भों तक पर चढ़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अप्रत्याशित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई संतोषजनक प्रबंध नहीं था और वहां गिनती के ही सुरक्षा कर्मी थे, हालांकि बाद में वहां काफी संख्या में सुरक्षा कर्मी पहुंच गए। यही नहीं लोगों द्वारा दर्शनों की जल्दबाजी में अनुशासन भंग हो रहा है जिसका परिणाम अनमोल प्राण जाने के रूप में निकला। कोरोना के चलते सिर्फ 25,000 श्रद्धालुओं को माता के दरबार के 14 किलोमीटर मार्ग पर जाने की अनुमति है, फिर किसने इतने लोगों को भवन पर जाने दिया? बिना यात्रा पर्ची के कैसे अधिक संख्या में श्रद्धालु पहुंच गए जबकि उन्हें दर्शनी द्वार पर या अर्ध कुंवारी में रोक दिया जाना चाहिए था। 

जहां उक्त घटना मानवीय भूल का परिणाम प्रतीत होती है वहीं दूसरी ओर नव वर्ष के प्रथम दिन ही हरियाणा में भिवानी जिले के तोशाम के डाडम इलाके में खनन के दौरान एक पहाड़ दरकने से विभिन्न मशीनें, ट्रक तथा अन्य वाहनों के अलावा वहां काम कर रहे कई कर्मचारी सैंकड़ों टन वजनी पत्थरों के नीचे दब गए और 4 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। 

उल्लेखनीय है कि दुर्घटना के 11 घंटे बाद भी अधिकारी यह नहीं बता पाए थे कि दुर्घटना के समय और कितने कर्मचारी वहां काम कर रहे थे। यहीं पर बस नहीं, इसी दिन तमिलनाडु के विरुधुनगर जिला में शिवाकाशी के निकट मेट्टुपट्टी में एक पटाखा फैक्टरी में विस्फोट से 5 श्रमिकों की दुखद मृत्यु हो गई। जब भी इस तरह की घटनाएं होती हैं तो सरकारें जवाबदेही से बचने के लिए जांच कमेटी आदि के गठन की घोषणा करके पीड़ितों को राहत राशि देने की घोषणा कर देती हैं ताकि जनता का आक्रोश ठंडा पड़ जाए। 

वैष्णो देवी तीर्थ पर हुई दुर्घटना के मामले में भी जम्मू-कश्मीर प्रशासन तथा प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 12-12 लाख रुपए व घायलों को 2-2 लाख रुपए राहत राशि देने के अलावा श्राइन बोर्ड ने घायलों का मुफ्त इलाज करवाने की भी घोषणा कर दी है। परंतु इसके साथ ही जरूरत इस बात की है कि धर्मस्थलों पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने व भीड़ पर काबू पाने के लिए प्रभावी और पुख्ता प्रबंध किए जाएं, विभिन्न कार्यस्थलों पर इंचार्ज समुचित सुरक्षा प्रबंधों के साथ वहां कार्यरत कर्मचारियों का पूरा विवरण रखें तथा पटाखा फैक्टरियों के प्रबंधक अपने यहां सुरक्षा प्रबंधों को अधिक मजबूत करें।—विजय कुमार

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