अधिक बच्चे पैदा करने का सुझाव लोग शायद ही स्वीकार करें

Edited By , Updated: 13 May, 2022 04:17 AM

people hardly accept the suggestion of having more children

समय-समय पर सभी समुदायों से सम्बन्ध रखने वाले हमारे चंद नेता अपने-अपने समुदाय के लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने की

समय-समय पर सभी समुदायों से सम्बन्ध रखने वाले हमारे चंद नेता अपने-अपने समुदाय के लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने की सलाह देते रहते हैं। इसी शृंखला में : 

* 15 दिसम्बर, 2021 को आल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुसलमीन के नेता गुफरान नूर ने कहा, ‘‘मुसलमानों को परिवार नियोजन नहीं अपनाना चाहिए। जब तक हमारे ज्यादा बच्चे नहीं होंगे, हम शासन कैसे करेंगे? ओवैसी साहब प्रधानमंत्री कैसे बनेंगे?’’ 

* 18 अप्रैल, 2022 को कानपुर में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित ‘रामोत्सव’ में बोलते हुए साध्वी ऋतम्भरा बोलीं, ‘‘अब हर हिंदू को 4 बच्चे पैदा करके इनमें से 2 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को सौंप देने चाहिएं ताकि वे राष्टï्र यज्ञ में योगदान दे सकें।’’ जब पत्रकारों ने उनसे कहा कि आपके इस बयान से तो नया बवाल खड़ा हो जाएगा तो उन्होंने उत्तर दिया, ‘‘हमने हिंदुओं को चेताया है, बवाल होता है तो हो जाने दो।’’

* 10 मई, 2022 को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी बोले, ‘‘पंजाबियों, खासकर सिखों द्वारा एक या दो बच्चे पैदा करने की रिवायत अपनाने से सिखों की संख्या का कम होना चिंता का विषय है। इसी कारण श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने हर सिख को चार बच्चे पैदा करने की अपील की थी जिसे मानने में हानि नहीं।’’ उल्लेखनीय है कि 2015 में ज्ञानी गुरबचन सिंह ने पटियाला में कहा था कि ‘‘सिखों को कम से कम 3 या 4 बच्चे पैदा करने चाहिएं जो इनकी कम होती संख्या में संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।’’ 

‘‘एक ओर आपके परिवार में 2 लोग हैं तो दूसरी ओर 10 लोगों का परिवार है। अब आप समझ सकते हैं कि किसके पास ज्यादा वोट हैं। इसीलिए मैं सिखों से कहता हूं कि वे अब ज्यादा बच्चे पैदा करें।’’
हर किसी को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है और चूंकि लोगों में कम संतान की चाहत बढ़ रही है इसलिए उक्त नेताओं ने यह बात कही है परंतु हमारे विचार में इसे अमल में लाना कठिन ही प्रतीत होता है क्योंकि वर्तमान हालात में इन सुझावों को स्वीकार कर पाना कठिन ही है।आज जबकि लगभग समस्त विश्व भयानक जनसंख्या विस्फोट की समस्या से जूझ रहा है, भारत भी इससे मुक्त नहीं है। 1951 की गणना के समय हम लगभग 36 करोड़ थे परंतु अब 138 करोड़ हो गए हैं। 

देश में बढ़ रही बेरोजगारी की स्थिति अत्यंत गंभीर हो चुकी है तथा कोरोना की महामारी ने इसे और बढ़ा दिया है। जिस धर्म को केंद्रित करके यह बात कही जा रही है उसमें भी बढ़ रही जागरूकता के कारण कम संतान पैदा करने का ही रुझान पैदा हो रहा है। इसी कारण आज पढ़ा-लिखा मुस्लिम समुदाय भी कम बच्चे पैदा कर रहा है क्योंकि पढ़-लिख कर ही लोग तरक्की करते हैं। जनसंख्या विस्फोट के कारण ही सारी दुनिया में कम बच्चे पैदा करने का रुझान शुरू हो गया है और हर सरकार भी यही चाहती है। इस उद्देश्य के लिए परिवार नियोजन के अनेक उपाय भी प्रचलित हैं। अनेक देशों में अवांछित संतान से बचने के लिए स्वैच्छिक गर्भपात की भी अनुमति है। 

अब जमाना बदल चुका है। हर शिक्षित व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म से क्यों न संबंध रखता हो, अपने बच्चों को उच्च शिक्षा और अन्य जीवनोपयोगी सुविधाएं उपलब्ध करवाने की इच्छा के चलते 2 से अधिक बच्चे नहीं चाहता, बल्कि कहीं-कहीं तो एक ही बच्चे का चलन शुरू हो रहा है तथा अपना  करियर बेहतर बनाने की चाहत में युवा देर से विवाह करने लगे हैं। इसी कारण इन दिनों जहां अरेंज विवाह नाकाम हो रहे हैं वहीं प्रेम विवाह अधिक सफल हो रहे हैं, जिसका कारण उनमें आई जागरूकता ही है। 

अधिक बच्चों वाले परिवारों मेें पर्याप्त शिक्षा व अन्य सुविधाएं न मिलने के कारण बच्चे जीवन में वह सफलता प्राप्त नहीं कर पाते जो अच्छी शिक्षा मिलने पर प्राप्त कर सकते थे। ऐसे परिवारों के सदस्यों का जीवन स्तर और स्वास्थ्य भी कम बच्चों वाले परिवारों की तुलना में कम रह जाता है। देश के अनेक भागों में जहां शिक्षा का प्रसार कम और गरीबी अधिक है, वहां सभी धर्मों के लोग अधिक बच्चे पैदा कर रहे हैं ताकि वे रोजी-रोटी कमाने में उनका सहारा बन सकें। ऐसे क्षेत्रों में हिंदुओं की जनसंख्या की वृद्धि दर तो सबसे अधिक है। यही कारण है कि अब अपने स्वास्थ्य के अलावा बच्चों को प्रत्येक क्षेत्र में बेहतर बनाने के लिए महिलाएं 2 से अधिक बच्चे नहीं चाहतीं। आज वे अपने बच्चों के पालन-पोषण में उनके स्वास्थ्य, उनकी शिक्षा व विकास पर इतना ध्यान दे रही हैं, जितना पुराने जमाने में 10 बच्चों पर भी नहीं दिया जाता था और ऐसा कम बच्चों के कारण ही संभव हो पाया है।—विजय कुमार 

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