‘पार्टी विद द डिफरैंस’ कहलाने वाली भाजपा का कांग्रेसीकरण

Edited By , Updated: 23 May, 2022 04:42 AM

congressization of bjp called  party with the difference

‘पार्टी  विद द डिफरैंस’ कहलाने वाली भारतीय जनता पार्टी का निष्ठावान कार्यकत्र्ता अपनी आंखों के सामने पंजाब भाजपा का कांग्रेसीकरण होते देख रहा है। जिस तेजी से कांग्रेसी नेता भाजपा

‘पार्टी  विद द डिफरैंस’ कहलाने वाली भारतीय जनता पार्टी का निष्ठावान कार्यकत्र्ता अपनी आंखों के सामने पंजाब भाजपा का कांग्रेसीकरण होते देख रहा है। जिस तेजी से कांग्रेसी नेता भाजपा को ज्वाइन कर रहे हैं, वह कहीं न कहीं पंजाब भाजपा के वर्तमान नेतृत्व और संगठन पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। 

यह इस बात को भी दर्शाता है कि पंजाब भाजपा की वर्तमान लीडरशिप और संगठन कहीं न कहीं अत्यंत कमजोर है जो पार्टी की नीतियों को आम जनता तक नहीं पहुंचा पा रही, तभी तो पार्टी को कांग्रेस से ऐसे लीडर्स इंपोर्ट करने पड़ रहे हैं, जो कभी कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के कहने पर भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए ताबड़तोड़ हमले करते रहे हैं। जिन्होंने भाजपा के वर्करों पर पिछले 5 सालों में झूठे पर्चे करवाए थे। आज उनका स्वागत भाजपा में दिल खोलकर किया जा रहा है जिन्होंने भाजपा का नि:स्वार्थ भाव से और अनुशासन और संगठन की पालना करने वाले कार्यकत्र्ता को हमेशा ही नीचा दिखाया। 

कार्यकत्र्ता हैरान-परेशान हैं कि जिस पार्टी को मजबूत और ताकतवर बनाने के लिए उनके बुजुर्गों ने अपना जीवन लगा दिया और इन कांग्रेसियों द्वारा दिए कष्ट सहन किए, वही उनके सिर पर थोपे जा रहे हैं। ये कांग्रेसी, जिन्हें उनकी पार्टी कांग्रेस ने उन्हें हाशिए पर ला दिया था, अब केंद्र की भाजपा सरकार से लाभ लेने के साथ-साथ अपनी महत्वाकांक्षा के चलते भाजपा में शामिल हो रहे हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भी पंजाब के वर्तमान कमजोर एवं दिशाहीन लीडर्स पर यकीन नहीं है, जो धड़ाधड़ कांग्रेसियों को भर्ती कर रहा है तथा पंजाब भाजपा के नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए केंद्र के आगे हाथ जोड़ कर खड़े हैं। 

भारतीय जनता पार्टी पंजाब ने 2022 के विधानसभा चुनाव में भी बहुत से कांग्रेसियों को पार्टी में शामिल कर टिकट देकर एक प्रयोग किया था जो बिल्कुल असफल रहा था और ज्यादातर उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई थी, जबकि भाजपा के गढ़ कहे जाने वाले हिंदू बहुल हलकों में भी पार्टी को मुंह की खानी पड़ी थी। इन हलकों के नेताओं ने शारीरिक रूप से तो पार्टी का साथ दिया था लेकिन मतदान के समय वोट नहीं डलवाया कि कहीं जीत कर यह हमें ही अदृश्य न कर दें। 

अब जो नेता कांग्रेस में या अन्य पार्टी में रहकर भाजपा को गालियां निकालता था वह पार्टी बदलने के बाद भाजपा के वर्करों से फिर से अपने नाम के जिंदाबाद के नारे भी लगवाएगा और उनसे चुनावों में काम भी करवाएगा। क्या यह ‘पार्टी विद द डिफरैंंस’ कहलाने वाली भाजपा को शोभा देता है, या पंजाब भाजपा में नेता या कार्यकत्र्ता खत्म हो गए हैं? 

यहां विचार करने वाली बात यह है कि अब विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कहलाने वाली भाजपा पंजाब में पिछले 72 सालों से अपना राजनीतिक आधार क्यों नहीं बना पाई? यहां पर क्या कमी रही? पूरे विश्व में इसका विस्तार हुआ तो पंजाब क्यों इससे वंचित रहा? पंजाब में कार्यकत्र्ताओं का मजबूत और संगठित बहुत बड़ा समूह होने के बावजूद सत्ता के गलियारे से दूर क्यों? क्या इसका कारण कार्यकत्र्ताओं की अनदेखी रही या उन्हें सही तरीके से संगठित नहीं किया गया? क्या पंजाब में भाजपा की कोई मजबूत नीति नहीं है? 

क्या कारण रहा कि 26 नवम्बर, 2012 को बनी नई राजनीतिक पार्टी बिना किसी कार्यकत्र्ता कैडर के 9 वर्ष में ही पंजाब की सत्ता पर काबिज हो गई और यह केवल 2 सीटों पर देखते ही रह गए? पार्टी के लिए मर-मिटने वाला कार्यकत्र्ता चुनाव में मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित क्यों नहीं कर पाता? पार्टी को अपनी कार्यशैली बारे मंथन करना होगा। कांग्रेसियों को पार्टी में शामिल करने के साथ-साथ अपनी कमियों की तरफ देखना होगा अर्थात अपनी पीढ़ी के नीचे भी सोटा फेरना होगा। 

ऐसा लग रहा है कि पार्टी ने अतीत से कोई सबक नहीं सीखा। पार्टी को मजबूत करने के साथ-साथ कार्यकत्र्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए। इस समय पार्टी और कार्यकत्र्ताओं को कांग्रेसियों के स्थान पर हौसले और मजबूत नेतृत्व की जरूरत है, जो धड़ेबाजी से ऊपर उठ कर सभी को साथ लेकर पार्टी और संगठन को मजबूत कर सके। अगर यही हाल रहा तो अगले कई सालों तक भाजपा पंजाब में सत्ता में नहीं आएगी और पंजाब भाजपा का कार्यकत्र्ता दरियां ही बिछाता रह जाएगा तथा कांग्रेसी हम पर राज करते रहेंगे। 

पंजाब भाजपा के जो नेता आज इन कांग्रेसी फसली बटेरों का स्वागत कर रहे हैं, वे ध्यान रखें कि यही कांग्रेसी आने वाले समय में उनको दरकिनार कर देंगे। मैं परम पिता परमात्मा से यही प्रार्थना करूंगा कि पंजाब भाजपा को जहां नाकाबिल और अपने अहं के कारण धड़ेबाजी में फंसे नेतृत्व से मुक्त करें, वहीं भाजपा संगठन को पंजाब में ऐसी शक्ति प्रदान करें कि यह अपने निष्ठावान और समर्पित कार्यकत्र्ताओं की अनदेखी करने की बजाय उन्हें उचित सम्मान देकर पार्टी को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि 2024 के संसदीय चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकें और 5 वर्ष बाद 2027 के पंजाब विधानसभा के चुनाव में राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बने। हम कैप्टन अमरेन्द्र सिंह तथा सुनील जाखड़ के बारे में कितना कुछ बोलते रहे, आज वही भारतीय जनता पार्टी के साथ हैं। समय बहुत बलवान है, यह सभी ने देख लिया है।-सुरेश कुमार गोयल
 

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