गेहूं निर्यात बहाली पर विचार करे सरकार

Edited By , Updated: 25 May, 2022 04:25 AM

government should consider restoration of wheat exports

यूक्रेन पर रूसी जंग से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गेहूं की सप्लाई घटी तो दुनिया के कई देश भारत की ओर देख रहे थे। देश में गेहूं के पर्याप्त भंडार के चलते पहली बार कई नए देशों को निर्यात की संभावना तलाशने एक्सपर्ट की टीमें भेजे जाने की तैयारी के बीच

यूक्रेन पर रूसी जंग से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गेहूं की सप्लाई घटी तो दुनिया के कई देश भारत की ओर देख रहे थे। देश में गेहूं के पर्याप्त भंडार के चलते पहली बार कई नए देशों को निर्यात की संभावना तलाशने एक्सपर्ट की टीमें भेजे जाने की तैयारी के बीच महंगाई और देश की खाद्य सुरक्षा को खतरे की आशंका का हवाला देते हुए 13 मई को गेहूं के निर्यात पर अचानक रोक लगा दी गई। दुनिया में संकट के समय गेहूं एक्सपोर्ट से होने वाली विदेशी मुद्रा की कमाई किसानों के साथ बांटने का एक अवसर था। निर्यात  पर तत्काल प्रतिबंध की बजाय हमारे नीति निर्धारित महंगाई और खाद्य सुरक्षा संकट की अटकलों से निपटने के लिए तय सीमा में निर्यात का विकल्प चुन सकते थे। 

हालांकि सरकार ने अपनी संशोधित नीति में देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार से सरकार को  निर्यात  की अनुमति दी है। इस पर करीब एक दर्जन देशों ने भारत से गेहूं खरीदने का अनुरोध किया है। ऐसे में सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार कर किसानों के लाभ के लिए इन देशों को  निर्यात  का रास्ता खोल सकती है। 

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गेहूं के बढ़े दाम के कारण इस बार कई प्राइवेट कंपनियों के मंडियों में उतरने से लंबे समय के बाद किसानों को एम.एस.पी से 250-350 प्रति क्विंटल अधिक दाम मिले। गेहूं  निर्यात  पर रोक के बाद से उत्तर प्रदेश,बिहार समेत कई राज्यों में 2015 रुपए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी) की तुलना में किसानों को 1,950 रुपए प्रति क्विंटल भाव मिल रहा है क्योंकि भारतीय खाद्य निगम(एफ.सी.आई)भी यहां से गेहूं नहीं खरीद रहा। निर्यात  जारी रहने की सूरत में गेहूं उत्पादक किसानों को इस बार अधिक लाभ की संभावना थी क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 453 डॉलर प्रति टन तक पहुंचे गेहूं के रिकॉर्ड भाव करीब 3,500 रुपए प्रति क्विंटल बैठते हैं। 

निर्यात पर प्रतिबंध से पहले इस वित्त वर्ष के लिए लगभग 42 लाख टन गेहूं निर्यात के सौदे किए जा चुके हैं , जिसमें से लगभग एक तिहाई निर्यात अप्रैल में हुआ। इस  निर्यात  से कमाई गई विदेशी मुद्रा से किसानों को 250 से 300 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जाए तो अत्यधिक गर्मी की मार से गेहूं की 25 प्रतिशत तक उपज गंवाने वाले किसानों के नुक्सान की भरपाई होती और केंद्रीय पूल के लिए भी सरकार को 444 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करने में मदद मिलती। इन हालात में भी पंजाब से केंद्रीय पूल के लिए गेहूं की सबसे अधिक 96.10 लाख टन की खरीद की गई जबकि मध्य प्रदेश में पिछले साल से करीब एक तिहाई खरीद(41.89 लाख टन) और हरियाणा में पिछले साल की तुलना में करीब आधे (40.64 लाख टन) पर गेहूं की सरकारी खरीद अटक गई। 

गेहूं का पर्याप्त स्टॉक : गेहूं के  निर्यात  पर प्रतिबंध का बड़ा कारण हमारी खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित करना है। लेकिन देश के गेहूं स्टॉक की वास्तविक स्थिति का अंदाजा 4 मई को, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के दावे से लगाया जा सकता है जिसमें कहा गया, ‘‘देश में अनाज की कुल उपलब्धता मार्च 2023 तक की जरूरत पूरी करने के बाद पर्याप्त मात्रा में स्टॉक रहेगा।’’ सार्वजनिक वितरण प्रणाली () और कल्याणकारी योजनाओं की जरूरत पूरा करने के बाद अप्रैल, 2023 में भारत के पास 80 लाख टन गेहूं का भंडार होगा जबकि बफर स्टॉक में कम से कम 75 लाख टन गेहूं रखा जाता है। 

केंद्र सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के मुताबिक, ‘‘गोदामों में लगभग 190 लाख टन गेहूं का स्टॉक पहले से पड़ा है और इस रबी सीजन में केंद्रीय पूल में सरकारी खरीद लगभग 195 लाख टन होने की उम्मीद है। पुराना स्टाक और नई खरीद मिलाकर कुल 385 लाख टन में से 305 लाख टन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एन.एफ.एस.ए.), ओ.डब्ल्यू.एस और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पी.एम.जी.के.वाई) के लिए है। 80 लाख टन गेहूं स्टॉक में सरप्लस बचता है।’’ 

अवसर : अभी दुनिया गेहूं के लिए भारत पर निर्भर थी क्योंकि अब से लेकर जुलाई के बीच दुनिया के किसी देश से गेहूं की आवक की उम्मीद नहीं है। यूक्रेन और रूस की गेहूं की फसल अगस्त और सितंबर तक तैयार होगी पर  जमीनी हालात सामने नहीं आए हैं कि यूक्रेन के गेहूं के खेतों, गोदामों और बंदरगाहों को जंग से कितना नुक्सान हुआ है। 

यूक्रेन-रूस की लंबी जंग भारत के लिए दुनिया के गेहूं बाजार में उतरने का एक अवसर था। गेहूं एक्सपोर्ट में रूस और यूक्रेन की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत थी, जबकि भारत की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम रही है क्योंकि लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें भारतीय मंडियों से भी कम थीं। दुनिया में गेहूं की जरूरत पूरी करने के लिए भारत कुछ समय बाद निर्यात पर प्रतिबंध हटाकर  इस वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 100 लाख टन गेहूं  निर्यात  की रणनीति बना सकता है। 

आगे का रास्ता : पहली बार है कि भारत मिस्र और तुर्की को गेहूं का निर्यात कर रहा है। कोई शक नहीं कि गेहूं का निरंकुश निर्यात देश की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। ऐसे में नियंत्रित गेहूं निर्यात नीति से न केवल किसानों को लाभ का रास्ता साफ होगा बल्कि टिकाऊ कृषि  निर्यात पॉलिसी के जरिए कई नए देशों में हमारे कृषि उत्पाद निर्यात की संभावनाएं तलाशने का एक अच्छा अवसर है।-डा. अमृत सागर मित्तल(वाइस चेयरमैन सोनालीका)
 

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