भारत संपूर्ण स्वच्छता नीतियों को लागू करने में विश्व का कर रहा नेतृत्व

Edited By ,Updated: 24 Nov, 2022 05:28 AM

india leading the world in implementing total sanitation policies

विश्व शौचालय दिवस मनाना, एक असामान्य अवसर की तरह लग सकता है, लेकिन यह बहुत से लोगों के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता सुनिश्चित करने के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण है। शौचालय के लिए

विश्व शौचालय दिवस मनाना, एक असामान्य अवसर की तरह लग सकता है, लेकिन यह बहुत से लोगों के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता सुनिश्चित करने के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण है। शौचालय के लिए समर्पित दिन, वैश्विक स्वच्छता संकट को रेखांकित करता है, जो सुरक्षित रूप से प्रबंधित शौचालय की सुविधा के बिना रह रहे दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रभावित करता है। स्वच्छ व सुरक्षित शौचालयों के बिना मानव अपशिष्ट समुदायों के खाद्य और जल स्रोतों को प्रदूषित करते हैं, जिससे लोग बीमारी की चपेट में आ जाते हैं और कुछ मामलों में तो उनकी मृत्यु भी हो जाती है। 

अपर्याप्त स्वच्छता महिलाओं के लिए एक बड़ी समस्या है, जिस कारण महिलाओं में शॄमदा होने की संभावना अधिक होती है। शौचालय सुविधाओं की कमी के कारण महिलाओं के लिए मासिक धर्म और गर्भावस्था को अकेले में प्रबंधित करना अक्सर असंभव होता है या उन्हें ऐसा करने के लिए अंधेरा होने का इंतजार करना पड़ता है, जो उन्हें अनजाने हमलों के प्रति कमजोर बनाता है। 

विश्व स्तर पर 3.6 बिलियन लोगों के पास स्वच्छता की सुरक्षित सुविधा नहीं है। इस तथ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, विश्व शौचालय दिवस, 2013 से हर साल मनाया जा रहा है। यह वैश्विक स्वच्छता संकट से निपटने के लिए कार्रवाई करने और ‘सतत विकास लक्ष्य, (एस.डी.जी.) 6- 2030 तक सभी के लिए स्वच्छता और जल  की उपलब्धि हासिल करने से सम्बंधित है। 2022 का अभियान ‘अदृश्य को दृश्य बनाना’ (मेकिंग द इनविजिबल विजिबल) इस बात की पड़ताल करता है कि कैसे अपर्याप्त स्वच्छता प्रणालियां मानव अपशिष्ट को नदियों, झीलों और मिट्टी में फैलाती तथा भूमिगत जल संसाधनों को प्रदूषित करती हैं। यह अदृश्य है, क्योंकि यह भूमिगत और सबसे गरीब और सबसे कमजोर समुदायों में होता है। 

यह कहा जा रहा है कि भारत में नीति-निर्माताओं के रूप में, हमने स्वच्छता और भूजल के बीच संबंध और इस महत्वपूर्ण जल संसाधन की सुरक्षा की पूरी तरह से पहचान की है, इसलिए यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि भारत ने 2019 में यानी 2030 के लक्ष्य के निर्धारित समय से 11 साल पहले ही एस.डी.जी. 6.2 का लक्ष्य हासिल कर लिया है! 11 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत शौचालयों तथा 2.18 लाख सामुदायिक स्वच्छता परिसर ‘सी.एस.सी.’ के निर्माण के साथ, भारत में प्राथमिक स्वच्छता सुविधा ‘बेहतर स्वच्छता सुविधाएं, जो अन्य परिवारों के साथ सांझा नहीं की जाती हैं’ का उपयोग करने वाले लोगों का प्रतिशत 2020 में दक्षिण-पूर्व एशिया के 63 प्रतिशत की तुलना में 67 प्रतिशत था।

यह आंकड़ा कोविड संकट के बावजूद और बेहतर हुआ है। केवल  इतना ही नहीं, बल्कि हम शौचालय के उपयोग से आगे जाकर, व्यापक अपशिष्ट प्रबंधन, विशेष रूप से मल गाद प्रबंधन ‘एफ.एस.एम.’ के साथ संपूर्ण स्वच्छता की ओर बढ़ रहे हैं, ताकि हमारे जल निकायों के प्रदूषण को रोका जा सके और पर्यावरण तथा लोगों की रक्षा की जा सके। 

एस.बी.एम. (जी), जो अब दूसरे चरण में है, के माध्यम से ग्रामीण भारत को ओ.डी.एफ. प्लस बनाने के क्रम में ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन के लिए समॢपत कार्यक्रम लागू किया गया है, जैसे मानव मल के सुरक्षित प्रबंधन के लिए 147 जिलों में 392 मल प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। नवाचारों के संदर्भ में, मशीनों की मदद से गाद प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए डी.डी.डब्ल्यू.एस. ने स्टार्टअप्स को शामिल करने के दायरे का विस्तार किया। 

ये बहुआयामी सकारात्मक प्रभाव, हितधारकों के लिए एस.बी.एम. (जी) में अपना समय और ऊर्जा निवेश करने की दृष्टि से काफी आकर्षक हैं, जैसे जल जनित रोगों (डायरिया, हैजा, टाइफाइड, पेचिश और हैपेटाइटिस) से रुग्णता और मृत्यु दर में महत्वपूर्ण कमी, अधिक किफायती जल आपूर्ति, स्थानीय आर्थिक विकास में वृद्धि, भूजल प्रदूषण में कमी, पास के जलभृतों की पुनर्भरण स्थिति में सुधार और कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपचारित जल का पुन: उपयोग। 

एक कार्यशील स्वच्छता प्रणाली के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े लाभ स्पष्ट हैं तथा कुछ दूरगामी फायदे भी होते हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, प्राथमिक स्वच्छता में निवेश किए गए प्रत्येक 1 डॉलर से, चिकित्सा लागत और उत्पादकता वृद्धि के रूप में 5 डॉलर वापस मिलते हैं। ये सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल- समुदायों, महिलाओं और कार्यान्वयन एजैंसियों के बीच सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हैं, ताकि सुरक्षित पेयजल और बेहतर स्वच्छता उपलब्ध कराई की जा सके तथा स्वच्छता और व्यक्तिगत कल्याण के बारे में महिलाओं को शिक्षित किया जा सके। 

हालांकि कॉरपोरेट और ग्रामीण डब्ल्यू.ए.एस.एच. (वॉश) सांझीदार फोरम के साथ हमारी ‘लाइटहाऊस पहल’, जिसमें सभी विकास क्षेत्रों से जुड़ी संस्थाएं शामिल हैं, हम देश के सभी गांवों के लिए ओ.डी.एफ. प्लस का दर्जा हासिल करने से संबंधित सभी प्रयासों को सुव्यवस्थित कर रहे हैं। देश के वॉश लक्ष्य महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन उन्हें हासिल करने के प्रयासों को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, पर्याप्त धन और सभी हितधारकों के बीच सांझेदारी का समान रूप से समर्थन प्राप्त है। हमारे प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में हम देश में संपूर्ण स्वच्छता की दिशा में हर संभव प्रयास कर रहे हैं। आपको भी अपना प्रयास जरूर करना चाहिए! (सचिव, पेयजल और स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार)-विनी महाजन

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