डॉलर या युआन : कौन बड़ा ठग

Edited By ,Updated: 29 Jun, 2022 01:28 PM

national news punjab kesari delhi g 7 narendra modi

दुनिया के 7 समृद्ध देशों के संगठन जी-7 के शिखर सम्मेलन में भारत को भी आमंत्रित किया गया था, हालांकि भारत इसका बाकायदा सदस्य नहीं है।

दुनिया के 7 समृद्ध देशों के संगठन जी-7 के शिखर सम्मेलन में भारत को भी आमंत्रित किया गया था, हालांकि भारत इसका बाकायदा सदस्य नहीं है। इसका अर्थ यही है कि भारत इन्हीं समृद्ध राष्ट्रों की श्रेणी में पहुंचने की पर्याप्त संभावना रखता है। जर्मनी में संपन्न हुए इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लेकर सभी नेताओं से गर्मजोशी से मुलाकात की, भारत की उपलब्धियों का जिक्र किया और इस संगठन के सामने कुछ नए लक्ष्य भी रखे। मोदी ने यह तथ्य भी बेझिझक प्रकट कर दिया कि भारत की आबादी दुनिया की 17 प्रतिशत है, लेकिन वह प्रदूषण सिर्फ 5 प्रतिशत ही कर रहा है।

दूसरे शब्दों में उन्होंने समृद्ध राष्ट्रों को अपने प्रदूषण को नियंत्रित करने का भी संकेत दे दिया। इसके अलावा उन्होंने समृद्ध राष्ट्रों से अपील की कि वे विकासमान राष्ट्रों की भरपूर मदद करें। संसार के देशों में बढ़ती जा रही विषमता को वे दूर करें। अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन तथा अन्य नेताओं ने इस अवसर पर घोषणा की कि वे अगले 5 वर्षों में 600 बिलियन डॉलर का विनियोग दुनिया भर में करेंगे ताकि सभी देशों में निर्माण कार्य हो सकें और आम आदमियों का जीवन-स्तर सुधर सके। 

जाहिर है कि इतने बड़े वित्तीय निवेश की कल्पना इन समृद्ध देशों में चीन के कारण ही जन्मी है। चीन ने 2013 में ‘बैल्ट एंड रोड एनीशिएटिव’ (बी.आर.आई.) शुरू करके दुनिया के लगभग 40 देशों को अपने कर्ज से लाद दिया है। श्रीलंका और पाकिस्तान तो उसके शिकार हो ही चुके हैं। भारत के लगभग सभी पड़ोसी देशों की संप्रभुता को गिरवी रखने में चीन ने कोई संकोच नहीं किया, लेकिन जो बाइडेन ने चीनी योजना का नाम लिए बिना कहा है कि जी-7 की यह योजना न तो कोई धर्मादा है और न ही यह राष्ट्रों की मदद के नाम पर बिछाया गया कोई जाल है। यह शुद्ध विनियोग है। इससे संबंधित राष्ट्रों को तो प्रचुर लाभ होगा ही, अमरीका भी फायदे में रहेगा। यह विकासमान राष्ट्रों को सड़कें, पुल, बंदरगाह आदि बनाने के लिए पैसा मुहैया करवाएगा।

 इस योजना के क्रियान्वित होने पर लोगों को सीधा फायदा मिलेगा, उनकी गरीबी दूर होगी, उनका रोजगार बढ़ेगा और लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था मजबूत होगी। संबंधित देशों के बीच आपसी व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने में भी इस योजना का उल्लेखनीय योगदान होगा। यह भी संभव है कि इस योजना में जुटने वाले देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते होने लगें। यदि ऐसा हुआ तो न सिर्फ वैश्विक व्यापार बढ़ेगा बल्कि संबंधित देशों में आम लोगों को चीजें सस्ते में उपलब्ध होने लगेंगी। उनका जीवन स्तर भी सुधरेगा। बाइडेन और अन्य जी-7 नेताओं की यह सोच सराहनीय है, लेकिन लंबे समय से डॉलर के बारे में कहा जाता है कि यह जहां भी जाता है, वहां से कई गुना बढ़ कर ही लौटता है। देखें चीनी युआन के मुकाबले यह कितनी कम ठगाई करता है।
dr.vaidik@gmail.com 

West Indies

137/10

26.0

India

225/3

36.0

India win by 119 runs (DLS Method)

RR 5.27
img title img title

Everyday news at your fingertips

Try the premium service

Subscribe Now!