सोने की लोकप्रियता अर्थव्यवस्था के लिए अनुत्पादक

Edited By ,Updated: 25 Jan, 2023 05:35 AM

the popularity of gold is counterproductive for the economy

भारत सोने के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है और बढ़ती समृद्धि इसकी मांग में वृद्धि कर रही है। वल्र्ड गोल्ड काऊंसिल के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2019 में भारतीय घरों में 25,000 टन तक सोना जमा हो सकता है, जिससे दुनिया के सबसे बड़े धातु धारकों के टैग...

भारत सोने के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है और बढ़ती समृद्धि इसकी मांग में वृद्धि कर रही है। वर्ल्ड गोल्ड काऊंसिल के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2019 में भारतीय घरों में 25,000 टन तक सोना जमा हो सकता है, जिससे दुनिया के सबसे बड़े धातु धारकों के टैग को बरकरार रखा जा सकता है।

मूल्य के संदर्भ में, यह 1300 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का हो सकता है। चूंकि सोना कुछ भी उत्पादन नहीं कर सकता, यह एक अनुत्पादक संपत्ति है। इसकी वृद्धि इस विश्वास पर निर्भर करती है कि भविष्य में कोई और इसके लिए अधिक भुगतान करेगा। यदि शेयरों या ऋण उपकरणों में कोई निवेश किया जाता है, तो यह देश की उत्पादकता और आर्थिक विकास में योगदान देगा। 

सोना रखना कम करने के उपाय : अलग-अलग समय पर भारत सरकार ने लोगों द्वारा सोना रखना कम करने के लिए कदम उठाए हैं। 1965 में, बेहिसाब धन के लिए कर छूट के साथ एक स्वर्ण बांड योजना शुरू की गई थी। 1968 में, सरकार व्यक्तिगत कब्जे में सोने की बिक्री और धारण को नियंत्रित करने के लिए स्वर्ण (नियंत्रण) अधिनियम लेकर आई। हालांकि आर्थिक उदारीकरण की शुरूआत करते हुए 6 जून, 1990 को स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम को समाप्त कर दिया गया था।

सरकार एक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम जारी कर रही है और कोई भी वास्तव में इसे धारण किए बिना सोने में निवेश कर सकता है। परिपक्वता पर निवेशक के पास सोने के बराबर मूल्य हो सकता है और बांड व्यापार योग्य भी होते हैं। वह कुछ ब्याज भी कमा सकता है। हालांकि, अगस्त 2021 में वित्त मंत्री के बयान के अनुसार, सरकार ने इनके लॉन्च के बाद से सिर्फ 31,290 करोड़ रुपए ही वसूले हैं। 

फिर भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से एक नई स्वर्ण जमा योजना लाई गई, ताकि लोग सरकार के पास सोना जमा कर सकें, योजना अवधि के दौरान ब्याज अर्जित कर सकें और परिपक्वता पर स्वर्ण बुलियन या नकद समतुल्य प्राप्त कर सकें। लेकिन जैसा कि निवेशकों को सोना जमा करने के लिए गहनों को पिघलाना पड़ता है, यह योजना लोगों के लिए आकर्षक नहीं थी। 

सोने के एवज में ऋण सुविधा : जब ये सभी योजनाएं वांछित परिणाम देने में विफल रहीं, तो यह अजीब है कि आर.बी.आई. बैंकों और एन.बी.एफ.सी. से सोने के गहनों के बदले भारी मात्रा में ऋण सुविधा की अनुमति दे रहा है। बैंकों द्वारा वितरित सोने के आभूषणों के खिलाफ ऋण सितंबर 2020 के अंत में 46,791 करोड़ रुपए से बढ़कर सितंबर 2021 तक 72,111 करोड़ रुपए और सितंबर 2022 तक 80,617 करोड़ रुपए हो गया।

आर.बी.आई. के आंकड़ों के अनुसार, सोने के खिलाफ बकाया ऋण लगभग दोगुना होकर वित्तीय वर्ष 20 में 33,303 करोड़ रुपए के मुकाबले वित्तीय वर्ष 21 में 60,464 करोड़ रुपए हो गया। आर.बी.आई. के दिनांक 17.03.2022 के बुलेटिन के अनुसार, 28.01.2022 को बकाया 69521 करोड़ रुपए था। सोने के एवज में व्यक्तियों को दिए गए अग्रिमों पर एन.बी.एफ.सी. के पास बकाया रुपए मार्च 2020 में 34678 करोड़ रुपए., मार्च 2021 में 94840 करोड़ रुपए और सितंबर 2021 में 114013 करोड़ रुपए था। आर.बी.आई. के दिनांक 29.12.2021 के प्रकाशन के अनुसार, 2020-21 में प्रतिशत भिन्नता 173.5 रही।

सोने के बदले उधार देने की जरूरत : सोने के गहनों के बदले उधार बंद करने से लोगों को अपनी होल्डिंग को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वास्तव में ऐसे ऋणों के लिए उच्च माॢजन और उच्च ब्याज दर होनी चाहिए। पिछले 3 वर्षों के दौरान भारत द्वारा आयातित सोने का विदेशी मुद्रा मूल्य 3440.94 रुपए (वित्तीय वर्ष 2022), 2542.88 रुपए (वित्तीय वर्ष 2021) और 1992.50 रुपए (वित्तीय वर्ष 2020) था। हम आम तौर पर हर साल 1,000 टन सोने का आयात करते हैं और अनुमान है कि अनौपचारिक चैनलों के माध्यम से और 200 टन सोना जोड़ा जाता है। होल्ड के आयात के लिए विदेशी मुद्रा का पर्याप्त व्यय होता है।

कदम उठाने का समय : सरकार और आर.बी.आई. को सोने जैसी अनुत्पादक संपत्तियों के अत्यधिक धारण के खिलाफ लोगों को हतोत्साहित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिएं। एकमुश्त प्रतिबंध सही समाधान नहीं दे सकता, क्योंकि यह प्रति-उत्पादक होगा।-एस. कल्याणसुंदरम

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