डीजल वाहनों पर प्रतिबंध: NGT ने रोक की अवधि बढ़ाई

Edited By ,Updated: 25 May, 2015 04:37 PM

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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एन.जी.टी.) ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 वर्ष पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के अपने

नई दिल्लीः राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एन.जी.टी.) ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 वर्ष पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले पर लगाई गई रोक आज 13 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी। एन.जी.टी. के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अगुआई वाली पीठ ने दिल्ली-एन.सी.आर. में ऐसे डीजल वाहनों पर प्रतिबंध पर लगी रोक को 13 जुलाई तक बढ़ाते हुए कहा कि उस दिन मामले की अंतिम सुनवाई होगी।

न्यायाधिकरण ने केंद्र और दिल्ली सरकार को 3 सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा कि उसके आदेश पर अब तक अमल क्यों नहीं किया गया? न्यायमूर्ति कुमार ने कहा कि तब तक सभी अंतरिम आदेश जारी रहेंगे। पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण के संदर्भ में अपनी रिपोर्ट के समर्थन में अतिरिक्त आंकड़े उपलब्ध कराने का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सी.पी.सी.बी.) को निर्देश दिया। पिछली सुनवाई को केंद्र सरकार ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आई.आई.टी.) दिल्ली के ताजा अध्ययन का हवाला देते हुए पुरानी गाड़ियों पर रोक हटाने का अनुरोध किया था लेकिन एन.जी.टी. ने इस रिपोर्ट को कोई तवज्जों नहीं दी थी और राजधानी में प्रदूषण को कम करने के लिए व्यापक रिपोर्ट मांगी।

पीठ ने सड़क परिवहन मंत्रालय और आई.आई.टी. को एक रिपोर्ट देने के लिए भी लताड़ लगाई थी। पीठ ने पूछा था, ''इस रिपोर्ट का आधार क्या है? आई.आई.टी. को इस मामले में टिप्पणी करने की कोई जरूरत नहीं है। यह रिपोर्ट पर्याप्त नहीं है। इसमें किसी भी जगह के नमूने नहीं लिए गए हैं। आई.आई.टी. बेहतर ढंग से काम कर सकती थी। बिना किसी अध्ययन के आपने 100 पृष्ठ तैयार कर लिए। आप आई.आई.टी. हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमेशा सही होंगे।'' पीठ ने कहा था कि आई.आई.टी. रिपोर्ट केवल निजी वाहनों से संबंधित है लेकिन राजधानी से गुजरने वाले ट्रकों और अन्य व्यावसायिक वाहनों के बारे में इसमें कुछ नहीं कहा गया है। 

उल्लेखनीय है कि न्यायाधिकरण ने 7 अप्रैल के अपने फैसले में डीजल को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का मुख्य कारण मानते हुए 10 वर्ष पुराने डीजल वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी थी। एन.जी.टी. ने फिर 13 अप्रैल को अपने फैसले पर 2 सप्ताह तक रोक लगा दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार के अनुरोध पर एन.जी.टी. ने इस रोक को फिर 2 सप्ताह तक और बढ़ा दिया था। तब एन.जी.टी. ने केंद्र के साथ-साथ दिल्ली सरकार, पैट्रोलियम मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय और दूसरे संबंधित विभागों को 2 सप्ताह के भीतर सुझाव देने को कहा था।

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