आटा मिलों के संगठन ने गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का स्वागत किया

Edited By jyoti choudhary, Updated: 14 May, 2022 04:14 PM

association of flour mills welcomes ban on export of wheat

आटा मिलों के संगठन आरएफएमएफआई ने शनिवार को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे घरेलू आपूर्ति को लेकर बाजार में ‘अनावश्यक घबराहट'' को रोकने के साथ ही किसी तरह की मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने में भी...

नई दिल्लीः आटा मिलों के संगठन आरएफएमएफआई ने शनिवार को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे घरेलू आपूर्ति को लेकर बाजार में ‘अनावश्यक घबराहट' को रोकने के साथ ही किसी तरह की मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (आरएफएमएफआई) के अध्यक्ष अंजनी अग्रवाल ने कहा कि संगठन ने गेहूं निर्यात के नियमन के बारे में सरकार से अनुरोध किया था। उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा स्थिति में सरकार द्वारा लिया गया यह एक बहुत अच्छा निर्णय है। इससे देश में गेहूं की आपूर्ति और कीमतों के बारे में अनावश्यक घबराहट पर लगाम लगाई जा सकेगी।'' 

उन्होंने कहा कि जून में समाप्त होने वाले फसल वर्ष 2021-22 में गेहूं का उत्पादन घटकर 9.5-9.8 करोड़ टन तक रहने की संभावना है। अग्रवाल ने कहा, ‘‘अगर गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया होता तो देश को कुछ महीनों के बाद गेहूं का आयात करना पड़ता।'' उन्होंने कहा कि निर्यात पर रोक लगने के बाद गेहूं और गेहूं के आटे की कीमतें अभी स्थिर रहेंगी। आटा (खुदरा) की कीमतें 26-28 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रही हैं, जबकि पैकेज्ड आटे की कीमतें 28-30 रुपए प्रति किलोग्राम हैं। उन्होंने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा, ‘‘आटा की कीमतें 40 रुपए प्रति किलो या इससे भी ज्यादा हो सकती थीं लेकिन अब इसकी कीमतें स्थिर होंगी।''

एक सरकारी अधिसूचना के अनुसार, भारत ने बढ़ती घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के उपायों के तहत गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 13 मई को एक अधिसूचना में कहा, 'गेहूं की निर्यात नीति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई गई है।' हालांकि महानिदेशालय ने कहा कि इस अधिसूचना की तारीख या उससे पहले अपरिवर्तनीय ऋण पत्र (एलओसी) जारी किए गए निर्यात की खेप की अनुमति रहेगी। 

सरकार ने जून में समाप्त होने वाले फसल वर्ष 2021-22 में गेहूं उत्पादन के अनुमान को 5.7 प्रतिशत घटाकर 10.5 करोड़ टन कर दिया है, जो अनुमान पहले 11 करोड़ 13.2 लाख टन का लगाया गया था। अनुमान घटाने का कारण तय समय से पहले गर्मी की शुरुआत होने से गेहूं की फसल उत्पादकता का प्रभावित होना है। गर्मियों में भारत का गेहूं उत्पादन फसल वर्ष 2020-21 (जुलाई-जून) में 10 करोड़ 95.9 लाख टन रहा। पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश ने 70 लाख टन गेहूं का निर्यात किया। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की स्थिति के कारण बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए भारत इस वित्तवर्ष में एक करोड़ टन गेहूं का निर्यात करना चाहता है। 
 

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